★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
श्रीनगर के ‘जेवन’ क्षेत्र में एक और ‘पुलवामा-काण्ड’ को आज (१३ दिसम्बर) दोहराया गया है। हमारे तीन पुलिसकर्मी मारे जा चुके हैं। लगभग १४ सैनिक गम्भीर रूप से घायल हैं। यह विडम्बना ही रही है कि देश मे जब चुनाव होने को होते हैं तब ही हमारे सैनिकों पर प्राणघातक हमले कराये जाते रहे हैं। वास्तविकता कुछ भी हो; परन्तु यह सत्य है कि जम्मू-कश्मीर का सुरक्षातन्त्र बेहद शिथिल है और देश की सरकार को जितनी गम्भीरता बरतनी चाहिए, नहीं बरती जा रही है। इसका मुख्य कारण है, कतिपय राजनेताओं की ‘सत्ताभक्ति’।
उल्लेखनीय है कि आज जिस समय ‘न्यू इण्डिया और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमन्त्री’ नरेन्द्र मोदी की वाराणसी में भक्ति-भाव को कथित गोदी मीडिया और एन० डी० टी० ह्वी० के संवाददाता घुटनो के बल इधर-उधर भागते हुए, क्षण-क्षण का ‘प्रशस्तिवाचन’ कर रहे थे उस समय श्रीनगर के ‘जेवन-क्षेत्र’ मे बस मे सवार हमारे पुलिसकर्मियों के शरीर को गोलियों से छलनी किया जा रहा था। देश के सभी समाचार-चैनलों की व्यक्तिपरक कुत्सित-कलुषित भक्ति के चलते हमे अपने देश के सुरक्षाकर्मियों पर किये गये हमले की सूचना से वंचित रखा गया था। इस समय भी नरेन्द्र मोदी का मानमर्दन किया जा रहा है। अब, जब कई राज्यों के चुनाव होनेवाले हैं तब नरेन्द्र मोदी को काशी का ध्यान आया, अब तक क्या कर रहे थे।

आज दिन में हमारे सुरक्षाकर्मियों को श्रीनगर के जेवन-मार्ग से बस ले जा रही थी तभी बस के आगे-पीछे घात लगाकर नवगठित ‘कश्मीर टाइगर्स’ के आतंकियों ने उनपर बन्दूकों और ग्रेनेड से हमलाकर लगभग १६ पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था, जिनमें से ३ सैनिकों की मृत्यु हो चुकी थी।
खेद है! देश के सभी समाचार-चैनल के मालिकानो को, जिनके लिए हमारे सुरक्षाकर्मियों पर किये गये आक्रमण से अधिक महत्त्व का समाचार ‘नरेन्द्र मोदी के काशी का आत्मप्रचारक कार्यक्रम’ था। बेशक, नरेन्द्र मोदी का समाचार दिखाया जाना चाहिए था; परन्तु मीडियाधर्मिता की रक्षा करते हुए।
दशकों से कुछ हटकर जिस रवीश कुमार का चैनल ‘एन० डी० टी० ह्वी०’ दिखता रहा, वह भी नरेन्द्र मोदी के सम्मुख नतमस्तक होता दिख रहा था। देश के सभी समाचार-चैनलों की मक्कारी इसी से सिद्ध हो जाती है कि ‘कल से लेकर आज तक’ सभी नरेन्द्र मोदी के वाराणसी के कर्मकाण्डों को अनथक दिखाते आ रहे हैं और अन्य महत्त्वपूर्ण समाचारों को गटक गये हैं। घिन आती है, देश के सभी समाचार-चैनल के सम्बन्धित कर्मियों और उनकी एकपक्षीय नीतियों पर।
हमे नहीं भूलना चाहिए कि आज ही की तिथि मे वर्ष २००१ में भारत की संसद् पर लगभग ४५ मिनट तक आतंकी हमला होता रहा और हमारे सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान पर खेलकर उन नेताओं को बचाये थे, जो देश को ‘हिन्दू-मुस्लिम’ ‘अगड़ा-पिछड़ा’ आदिक बेहद घटिया खेल खेलते हुए, भारती समाज के आन्तरिक सौहार्द और सौजन्य को नष्ट करते आ रहे हैं और ‘अभेद की गोद मे भेद’ को बैठाते आ रहे हैं।
ऐसा लगता है, भारत के गृहमन्त्रालय और सुरक्षातन्त्र ने ‘पुलवामा-काण्ड’ से कोई शिक्षा नहीं ली है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १३ दिसम्बर, २०२१ ईसवी।)