‘आँगन का पंछी गौरइया’ का लोकार्पण

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर श्री काली मंदिर आश्रम बैजलपुर, कोल्हनपुर, जिला गोंडा के पवित्र प्रांगण मे प्रद्युम्ननाथ तिवारी ‘करुणेश’ के काव्यसंग्रह ‘आँगन का पंछी गौरइया’ का लोकार्पण अध्यात्म और साहित्य के विभूति- द्वय सरयू आरती अयोध्या के संत प्रवर महंत शशिकांत दास जी एवं श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति संस्कृत-मनीषी आचार्य मुरली मनोहर पाठक-द्वारा किया गया । रचनाकार करुणेश ने अपनी रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा, ” गौरइया की रचना करते समय हमने इस पक्षी के साथ एकात्मकता के भाव का अनुभव किया है , सच पूछिये तो एकात्मकता स्थापित कियै बगैर कोई भी रचना, चाहे वह ईश्वर पर हो या किसी जीव पर, हो ही नही सकती।” कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय मेदिनी नगर, पलामू (झारखंड ) के प्रति-कुलपति एवं दर्शनशास्त्र के विद्वान् डॉ० दीपनारायण यादव ने कहा,” करुणेश जी-द्वारा रचित इस कृति की समस्त रचनाओं में संवेदना एवं प्रेम का चरम प्राकट्य है । इन रचनाओं में अथाह प्रेम तथा वात्सल्य भाव निहित है।”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति डॉ० मुरलीमनोहर पाठक ने कहा, ”आँगन का पंछी गौरइया’ में गौरइया के माध्यम से कवि ने मानव-संवेदना के साथ पक्षि-संवेदना का तादात्म्य स्थापित किया है। स्वामी शशिकांत दास जी महाराज एवं सभा की अध्यक्षता कर रहे आचार्य पंडित रघुनाथ दास शास्त्री जी ने कवि को आशीर्वाद प्रदान किये। इस अवसर पर मनीष शुक्ल, श्याम प्रकाश पांडेय, डॉ० संजय कुमार शुक्ल आदिक प्रबुद्धजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ० प्रवीण कुमार शुक्ल और आभार-ज्ञापन डॉ० अशोक कुमार पाण्डेय ने किये।