वाह रे भारत की धर्मनिरपेक्षता !

राघवेन्द्र कुमार “राघव”-


यदि भारत में गैर मुसलमान से कुरआन को ईश्वरीय हिदायतनामा मानने की उम्मीद की जाती है तो यह भी सोचना चाहिए कि सच्चा हिन्दू मनुस्मृति और पुराणों को कैसे नकार सकता है ।

यदि कुरआन में लिखा हुआ अमिट है तो रामायण और पुराणों का एक एक शब्द सत्य है । हालांकि व्यक्तिगत रूप से मैं पुराणों में निहित धर्म तत्व एवं ईश वाक्यों को छोड़कर उसमें भरी दुनियादारी को नकारता हूँ । यदि भारत का कानून और ओछी राजनीति करने वाला तबका इस्लाम के अल्लाहनामा अर्थात कुरआन की हर एक बात को अल्लाह का सन्देश कहेगा तो फिर वेद, उपनिषद, शास्त्र, ब्रह्मसूत्र, स्मृति, रामायण, महाभारत को ईशग्रन्थ क्यों नहीं कहा जाएगा । एक बात बताइए कि कुरआन को नाज़िल होते किसने देखा । जो भी मुहम्मद साहब ने कह दिया, मानने वालों ने विश्वास कर लिया ।

सत्य तो यह है कि कोई भी पुस्तक या आयत या श्लोक स्वतः धरती पर नहीं आ गया अपितु किसी विद्वान, ऋषि, महात्मा या लेखक द्वारा अनुभव के आधार पर या फिर किसी योगी, महात्मा के विचारों के संग्रह के रूप में मन्त्रों, श्लोकों, ऋचाओं, आयतों या फिर नियमों का प्रादुर्भाव हुआ । इस तरह यदि “कुरान” में लिखे होनें से कोई काफ़िर हो जाता है तो इस्लाम की द्वेषवादी प्रकृति के आधार पर सनातन दीन को अधर्म घोषित करता है । यह तो सभी जानते हैं कि इस्लाम की पैदाइश तब हुई जब सनातन भारत और विश्व को हिन्दू, जैन और बौद्ध जैसे धर्म दे चुका था । सच्चाई तो यह है कि इस्लाम समाज में उत्पन्न हो गए अधर्म के पक गए फोड़े का दूषित रक्त भर है । ऐसा गन्दा ख़ून जिसकी बदबू से विश्व आज भी त्राहि–त्राहि कर रहा है । इस्लाम नास्तिकों, अधर्मियों, वाममार्गियों और म्लेक्षों की पनाहगाह से ज्यादा कुछ भी नहीं है ।

सम्पूर्ण हिन्दू समाज को यह विचार करने की जरूरत है कि यह भारत देश श्री राम का गर्व है । प्रभु श्री राम इस देश के वासियों के हृदय का स्पन्दन हैं । प्रभात की सूचना देने वाले प्रकाश हैं । हिन्दू मन के सम्राट हैं । हमारे स्वामी और आराध्य हैं । । प्रभु श्री राम ही हमारा इतिहास और वर्तमान हैं । श्री राम ही हमारे भविष्य के सृजनहार हैं । तीन तलाक को तो कुरआन में लिखा मानकर उसे जस का तस मानने को राजी हैं । अफसोस हिन्द के कण-कण में बसे श्री राम की जन्म स्थली अयोध्या है, नहीं मानते । मुसलमानों की एक किताब का भरोसा है लेकिन भारत के गौरवशाली इतिहास का ज्ञान नहीं है ।

हजारों वर्ष प्राचीन भोजपत्रों पर लिखी सैकड़ों पुस्तकों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की गौरवगाथा का संज्ञान नहीं है लेकिन 1500 साल पहले कथित किताब का विश्वास है । वाह रे भारत की धर्म निरपेक्षता !