तुम मेरे दिल के इतने क़रीब हो, चाह कर भी मैं तुम्हें भूल नहीं सकती। तुम मीठा–सा मेरे हृदय का वह एहसास हो, जिसे याद करके मेरा रोम–रोम पुलकित हो उठता है।
चेतनाप्रकाश चितेरी, प्रयागराज
तुम मेरे दिल के इतने क़रीब हो, चाह कर भी मैं तुम्हें भूल नहीं सकती। तुम मीठा–सा मेरे हृदय का वह एहसास हो, जिसे याद करके मेरा रोम–रोम पुलकित हो उठता है।
चेतनाप्रकाश चितेरी, प्रयागराज