हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं एवं प्राकृतिक आपदाओं व मानवजनित संकटों के चलते जानमाल को होने वाले जोखिमों को कम करना एक साझा दायित्व है ।
हिमाचल प्रदेश पुलिस के सभी कर्मचारी और अग्निशमन विभाग के कर्मचारी फर्स्ट रेसपॉण्डर होते है इन्हे ट्रेनिंग के दौरान और रिफ्रेशर कोर्सेज में प्राथमिक चिकित्सा में निपुण किया जाता है । सुप्रीम कोर्ट के गुड समार्टियन आदेशानुसार घायलों को गोल्डन आवर कांसेप्ट में चिकित्सीय सहायता और अस्पताल पहुंचने तक ये जोखिम कम किया जा सकता है। सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले या घायल होने वाले लोगों में 30% से अधिक संख्या 25वर्ष से कम आयु के युवाओं की होती है । इसके मद्देनजर खंड चिकित्साधिकारी नगरोटा बगवां डॉ रूबी भारद्वाज (जिन्होंने अपनी सेवाएं द्वितीय सशस्त्र वाहिनी सकोह में 8 साल दी हैं) ने पानी एनजीओ के सहयोग से 7-7 फर्स्ट एड किट्स एस०एच०ओ नगरोटा बगवां श्री अशोक राणा तथा अग्निशमन अधिकारी श्री अमरनाथ को दी ।
खंड चिकित्सा अधिकारी ने बताया की हिमाचल प्रदेश में अपनी तरह का ये अनूठा प्रयास है और सभी पुलिस थानो तथा अग्निशमन विभाग में इस तरह का अनुसरण करना चाहिए। इस मौके पर पानी संस्था की और से श्री मृदुल खरे और श्री गौरव भी उपस्थित रहे।