विश्व कप फुटबॉल-फ़ाइनल-प्रतियोगिता रोमांचित करती रही!

मुक़ाबला ‘पेनाल्टि शूट-आउट’ मे पहुँचा और चैम्पियनशिप ‘अर्जेण्टीना’ की झोली मे आयी

● क्रीड़ा-समीक्षक– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

वाह! आज (१८ दिसम्बर) भारतीय समयानुसार सन्ध्या ८.३० से रात्रि ११.२० बजे तक का समय ‘टी-२०’ के रोमांच से भी बढ़कर दिख रहा था; पल-पल बदलते-बढ़ते रोमांच और अनिश्चितता परिणाम को ‘सूरज और बदली’ की लुक-छिप की तरह से दिखा रहे थे। दोहा (क़तर) के ‘लुसैल’ स्टेडियम मे खेले गये विश्व कप फुटबॉल के अन्तिम मुक़ाबले के प्रथमार्द्ध (पहला हाफ़) मे अर्जेण्टीना का वर्चस्व खेल-मैदान मे पूरी तरह से दिख रहा था, जिसका परिणाम रहा कि खेल के प्रथमार्द्ध के २२वें मिनट मे लियोनल मेसी ने पेनाल्टि लेते हुए, अपने देश के लिए पहला गोल कर दिया था। उसके बाद अर्जेण्टीना के खिलाड़ी और आक्रामक होते गये; सही मौक़ा देखकर एंजिल डी मारियो ने ३७ वें मिनट मे दूसरा गोलकर अर्जेण्टीना को २-० से सुरक्षित स्थिति मे पहुँचा दिया था।

खेल के द्वितीयार्द्ध (दूसरे हाफ़) मे फ्रांस की आक्रामक और सुरक्षात्मक नीति पूरी तरह से बदली नज़र आ रही थी। अर्जेण्टीना के हर आक्रमण व्यर्थ सिद्ध होते रहे और फ्रांस के प्रत्याक्रमण का जवाब अर्जेण्टीना के पास नहीं था। यही कारण था कि २ मिनट के भीतर (८०वें-८१वें मिनट) फ्रांस के एम्बाप्पे ने दो गोल करके मुक़ाबले को रोमांच के चरमोत्कर्ष तक पहुँचा दिया था। २-२ की बराबरी के चलते, खेल ‘अतिरिक्त समय’ (३० मिनट) की माँग कर रहा था, ताकि विश्व को फुटबॉल का एक चैम्पियन मिल सके। द्वितीयार्द्ध मे अर्जेण्टीना के खिलाड़ी कुछ शिथिल दिख रहे थे। दोनो देशों को ‘पेनाल्टि’ से १-१ गोल मिल चुके थे। इस तरह ९० मिनट के खेल मे भी हमे विश्व-चैम्पियन नहीं मिल पाया था।

प्रतिद्वन्द्वी खिलाड़ी एक-दूसरे को धक्का देते रहे; पैर-से-पैर लड़ाते रहे; सिर पर हाथ बलपूर्वक रख रहे थे; परन्तु निर्णायक (रेफ़्री) उन अवैध गतिविधियों को जाने क्यों (‘न जाने क्यों’ अशुद्ध है।) नज़रअन्दाज़ करते दिख रहे थे। बेशक, पीला कार्ड दिखाया जाता रहा; परन्तु कम दिखाया गया था। एक बात सराहनीय रही कि निर्णायकों के निर्णय विवादरहित रहे।

‘अतिरिक्त समय’ मे दोनो ही दलों के खिलाड़ी संघर्षपूर्ण मुक़ाबले करते दिख रहे थे। चूँकि दोनो ही दल २-२ की बराबरी पर थे इसलिए पूरी तरह से जूझ रहे थे; क्योंकि किसी का एक भी गोल मैच का परिदृश्य बदल सकता था। ‘अतिरिक्त समय’ मे खेल का आधा समय गोलरहित रहा; लेकिन अर्जेण्टीना बीस साबित हो रहा था; अन्तत: फ्रांस के जबड़े से गोल छीनते हुए, अर्जेण्टीना और विश्व के सुप्रसिद्ध खिलाड़ी ‘१० नम्बरी’ (दस नम्बर की जर्सीवाले) लियोनल मेसी ने मैदानी गोल करते हुए, इस विश्व कप मे अपने लिए ‘सातवाँ’ गोल किया था। इस प्रकार अर्जेण्टीना ३-२ से आगे बढ़ चुका था।

खेल मे उस समय ज़बरदस्त मोड़ आया था जिस समय अर्जेण्टीना के खिलाड़ी गोंजालो एमेण्टो की लापरवाही के कारण फ्रांस को ‘पेनाल्टि’ दिया गया और विश्व कप फुटबॉल के फ़ाइनल मे अतिरिक्त समय के समाप्त होने के २ मिनट-पहले फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे ने अपना लगातार तीसरा गोल (हैट्रिक) करते हुए, मैच को ३-३ से बराबर कर दिया था। ५ सेकण्ड-पहले फ्रांस की ओर से किये जानेवाले गोल को अर्जेण्टीना का गोलरक्षक शानदार और जानदार बचाव कर, मैच को ‘पेनाल्टि शूट-आउट’ की ओर ले गया। इसमे अर्जेण्टीना ही आगे रहा था।

९० मिनट, ३० मिनट फिर ‘पेनाल्टि शूट-आउट’ का रहस्य और रोमांच मैदान के भीतर और बाहर हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा था। अब फ्रांस और अर्जेण्टीना के गोलरक्षकों सारा दबाव आ चुका था।

पहले फ्रांस ने गोल किया था; फिर ‘१० नम्बरी मेसी’ ने किया था। फ्रांस के किंग्स्ले कोमैन दूसरा गोल करने मे विफल रहे और अर्जेण्टीना सफल रहा। फ्रांस के ओरेलिएन चाउआमेनी तीसरा गोल करने से चूक गये। अर्जेण्टीना अपना तीसरा गोल करके आगे बढ़ चुका था। फ्रांस चौथा गोल करने मे सफल रहा। अर्जेण्टीना की ओर से स्थानापन्न (सब्स्टिच्यूट) खिलाड़ी गोंजालो माण्टिएल ने निर्णायक गोलकर दिया था। इस प्रकार अर्जेण्टीना ‘पेनाल्टि शूट-आउट’ मे अपना जलवा दिखाते हुए, ४-२ से अन्तिम मुक़ाबला जीतते हुए, ३६ वर्षोंं-बाद विश्व कप फुटबॉल-चैम्पियनशिप ‘फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी’ पर अधिकार कर लिया है।

विश्व मे सर्वाधिक प्रशंसा पानेवाले महान् खिलाड़ी और अर्जेण्टीना के कप्तान मेसी के लिए यह विश्व कप अन्तिम था और उनके खिलाड़ियों ने ‘फीफा कप ट्रॉफ़ी– २०२२’ जीतकर उनकी अविस्मरणीय विदाई की है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १९ दिसम्बर, २०२२ ईसवी।)