वर्ण, गोत्र, जाति और वंश

युवा जरूर पढ़ें यह आर्टिकल व अपनी प्रतिक्रिया भी लिखें…!!

प्रश्न–
जाति क्या है…?
What is the caste…?
उत्तर–
जन्मतः प्राप्त उपाधि ही जाति है।

जो जिससे जन्म लेता है वह उसी जाति की उपाधि वाला होता है।

जैसे- दशहरी आम के बीज से जन्मा या उत्पन्न हुआ वृक्ष ही दशहरी आम की जाति का होता है।

प्रश्न;
जातिवाद क्या है…?
What is racism…?
उत्तर;
मानवसमाज में जाति के आधार पर कर्म-पद-सम्पदा पर स्वामित्व की प्रथा ही जातिवाद है।

जातिवादी व्यवस्था के अंतर्गत समाज में भी जंगल की भांति जो जिससे जन्म लेता है वह अपने पिता के कर्म, पद और सम्पदा का स्वामी बन जाया करता है।

समाज में कर्म-पद-सम्पदा पर यह पैतृक स्वामित्व की परम्परा ही जातिवाद का मुख्य जहर है।
जिसने पूरी दुनिया को बर्बाद किया है।

प्रश्न;
जाति और वंश में क्या भेद है..?
उत्तर;
जाति केवल एक पीढ़ी तक ही सीमित रहती है किन्तु वंश लंबी अवधि तक लगातार पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है।
पीढ़ियों की श्रंखला को ही वंश कहते हैं।

प्रश्न;
वंश और गोत्र में क्या भेद है…?
उत्तर;
जब कोई वंश किसी विशेष गुणकौशल संपन्न महापुरुष के नाम से जाना जाता है तो उसे ही गोत्र कहा जाता है।

प्रश्न;
वर्ण क्या है…?
उत्तर;
संस्कृत की ‘वृ’ धातु से ‘वर्ण’ शब्द बना है।

जिसका अर्थ है- चुनना, चयन करना, योग्य होना, वरेण्य होना, सुपात्र होना आदि।

विशिष्ट क्षमताओं योग्यताओं गुणों कौशलों के विकास द्वारा सुपात्र सिद्ध होना ही वरेण्यता है।

प्रश्न;
जाति और वर्ण में क्या भेद है…?
उत्तर;
जन्म पर आधारित व्यवस्था ही जाति है।
गुण पर आधारित व्यवस्था ही वर्ण है।

प्रश्न;
जातिवाद और वर्णवाद में क्या भेद है…?
उत्तर;
जातीयताक्रम पर आधारित व्यवस्था ही जातिवाद है।

योग्यता, गुणवत्ता अर्थात वरीयताक्रम पर आधारित व्यवस्था ही वर्णवाद है।।
जातिवाद से ‘पशुता’ उत्पन्न होती है।
वर्णवाद से ‘मानवता’ उत्पन्न होती है।।

जातिवाद से समाज में ‘जंगलराज’ उत्पन्न होता है।

वर्णवाद से समाज में ‘मंगलराज’ उत्पन्न होता है।।

प्रश्न;
जातिवाद की समाप्ति का उपाय क्या है…?
उत्तर;
समाज में वर्ण व्यवस्था की स्थापना ही जातिवाद की समाप्ति का एकमात्र उपाय है…!!

प्रश्न;
वर्ण व्यवस्था क्या है..?
उत्तर;
मनुष्यों में चार प्रकार की क्षमताओं के विकास की संभावना होती है- शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, चेतनात्मक।

इन चारों क्षमताओं को ही क्रमशः PQ, IQ, EQ, SQ कहते हैं।
मूलतः इन्हीं चारों क्षमताओं पर आधारित पात्रता के अनुरूप कर्म पद सम्पदाओं पर स्वामित्व का विधान ही ‘वर्णव्यवस्था’ है।
PQ को कृषि संबंधी कर्म पद सम्पदा का स्वामित्व न्यायसंगत है।

IQ को वाणिज्य संबंधी कर्म पद सम्पदा का स्वामित्व न्यायसंगत है।

EQ को राज्य संबंधी कर्म पद सम्पदा का स्वामित्व न्यायसंगत है।

SQ को नेतृत्व संबंधी कर्म पद सम्पदा का स्वामित्व न्यायसंगत है।

प्रश्न;
वर्ण व्यवस्था को समाज में लागू कैसे किया जा सकता है..?
उत्तर;
समाज में वर्णव्यवस्था को लागू करना बहुत सरल है।

निम्लिखित उपाय अपनाएं…
वर्णव्यवस्था की क्रमबद्ध पात्रताओं का सही सैद्धांतिक प्रतिपादन।

चारों वर्णात्मक पात्रताओं के परीक्षण की समुचित व्यवस्था।

वर्णव्यवस्था स्वीकार करने वाले व्यक्तियों की पात्रता का समुचित परीक्षण और पात्रताप्रमाणीकरण।

परीक्षणों द्वारा सिद्ध पात्रता के अनुरूप कर्म-पद-सम्पदा पर स्वामित्व का अधिकार।

प्रश्न;
क्या इस विज्ञानसम्मत न्यायसंगत वर्णव्यवस्था में हिन्दू मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी, बहाई अथवा किसी भी मज़हब या संप्रदाय या किसी भी जाति और वंश के लोग भी सम्मिलित हो सकते हैं…?
उत्तर;
अवश्य….!!
यह वर्ण व्यवस्था सार्वजनिक, सर्वदेशीय और सर्वकालिक है।

यह सर्वहितकारी और सर्वसुखदायक है।

यह विश्वबंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम् की प्रतिष्ठापक है।

तथा मानव जीवन के समग्र विकास में परम सहायक भी है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं…!!
✍️🇮🇳

-(राम गुप्ता – स्वतंत्र पत्रकार – नोएडा)