रोजगार बैंक बनाओ

धूर्त व्यक्ति चाहता है अच्छा स्कूल बने, अच्छा अस्पताल बने, अच्छी सड़क बने, जिनको मिल रही है उनको और भी अधिक बेहतर शिक्षा मिले, बेहतर चिकित्सा मिले, बेहतर सुविधा मिले।
लेकिन धूर्त कभी यह नहीं चाहता कि ये सब सेवाएं समान रुप से न्यायपूर्वक प्रत्येक नागरिक को मिलें।

मूर्ख प्रजा इन धूर्तों की घुमावदार बातों को कभी समझ भी नहीं पाती, यही इन धूर्तों की सफलता का असली रहस्य है।

और ये धूर्त कभी नागरिकों के रोजगार के लिए निःशुल्क निर्ब्याज संसाधन या पूंजी सुलभ कराने की तो बात ही नहीं करते, जो जनता की मूल जरूरत है।

रोजगार होगा तो जनता पैसा कमा लेगी और इस पैसे से वह अपनी शिक्षा, सुविधा, इलाज खुद करवा लेगी।
आम जनता की मूल समस्या तो गरीबी है जो बेरोजगारी से उत्पन्न होती है।

धूर्त शासनसत्ता नागरिकों को रोजगार के अवसर व संसाधन नहीं देना चाहती इसका मुख्य कारण बस इतना है कि यदि रोजगार के अवसर व संसाधन नागरिकों को दिए गए तो इनकी गुलामी कौन करेगा?

आज़ादी से अबतक देश के आम नागरिकों के लिए न तो शिक्षा पर न्यायोचित कार्य किया गया और न ही उनके नौकरी/रोजगार पर न्यायोचित कार्य हुवा।

ऐसा भी नहीं है कि शासनसत्ता के पास बजट नहीं है इन दोनों योजनाओं के लिए बस इनकी नियत नहीं है।

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि नागरिक जागरूक हो रहे हैं उन्हें अपने नागरिक जनाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

उन्हें यह पता चल गया है कि पूर्ण शिक्षित/प्रशिक्षित होने के फायदे क्या हैं व रोजगार सम्पन्न रहने के फायदे क्या हैं।

बड़ा आंदोलन तय है
इसलिए
एम्प्लायमेंट फण्ड बनाओ।
बेरोजगारी को जड़ से मिटाओ।।
जनता को धूर्तों के चंगुल से बचाओ।।

राम गुप्ता, स्वतंत्र पत्रकार, नोएडा