उन्हें औक़ात पर अब लाइए साहिब!

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

उनकी बातों में मत आइए साहिब!
उनकी घातों में मत आइए साहिब !
हर गोट के मिज़ाज से वाक़िफ़ हैं वे,
भूलकर धोखा मत खाइए साहिब!
ख़ैरात भी माँगे तो मत दीजिए उन्हें,
उन्हें औक़ात पर अब लाइए साहिब!
हुस्न का बाज़ार सज गया है सलीक़े से,
एक बार तशरीफ़ ले आइए साहिब!
दिन के अँधेरे में हर जगह नहीं दिखते,
रात के उजाले में उन्हें पाइए साहिब!

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १ मई, २०२१ ईसवी।)