‘मुक्त मीडिया’ का ‘आज’ का सम्पादकीय
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
५ अगस्त की तारीख़ में लेबनान की राजधानी बेरूत में विस्फोटक पदार्थ का भयावह प्रभाव दिख रहा है। विस्फोट कैसे हुआ? जितने मुँह-उतनी बातें। बहरहाल, उस विस्फोट की चपेट में आने से सैकड़ों लोग मृत्यु को प्राप्त हो गये हैं और हज़ारों घायल हैं। लेबनान की राजधानी ‘बेरूत’ में ख़ौफ़ का अभूतपूर्व मंज़र को देखकर वहाँ के लोग उक्त घटना की तुलना जापान के नागासाकी-हिरोशिमा में किये गये परमाणु-विस्फोट से कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बेरूत-स्थित बन्दरगाह के एक गोदाम में वर्ष २०१४ से २,७५० /२७५९ टन अमोनियम नाइट्रेट असुरक्षित तरीक़े से रखा हुआ था, जिसमें विस्फोट होने से उक्त प्रकार की घटना हुई थी। दूसरी ओर, लेबनान के राष्ट्रपति का कहना है कि यह कहना ग़लत बात है कि विस्फोटक सामग्री असुरक्षित ढंग से रखी गयी थी। यदि ऐसा नहीं है तो विस्फोट का कारण सामने आना चाहिए। विस्फोट के कारणों की जाँच के लिए लेबनान की जाँच-एजेंसी सक्रिय हो गयी है। बेरूत में जहाँ विस्फोट हुआ था, वहाँ से १० किलोमीटर तक का भूभाग खण्डहर बन चुका है। सागर का जल भूकम्प के प्रभाव- जैसा आन्दोलित हो उठा था। जर्मनी के जियो-साइंस-केन्द्र ‘जी०एफ०ज़ेड०’ के विज्ञानियों के अनुसार, बेरूत में विस्फोट इतना प्रभावकारी था कि उससे रिक्टर पैमाने पर ३.५ की तीव्रतावाला भूकम्प आया था।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कई किलोमीटर तक शव बिछे हुए थे। विस्फोट इतना भीषण था कि उसकी भयावह आवाज़ पूर्वी भूमध्यसागर में २४० किलोमीटर दूर साइप्रस तक सुनायी दी थी। आस-पास के सभी भवन ध्वस्त हो गये थे, जिसके कारण चारों ओर मलबे-ही-मलबे बिखरे पड़े थे।
उल्लेखनीय है कि यह घटना उस समय हुई थी, जिस समय लेबनान के लोग वहाँ के पूर्व-प्रधानमन्त्री रफ़ीक़ हरीरी की हत्या-प्रकरण को लेकर चल रहे मुक़द्दमे के फ़ैसले की प्रतीक्षा कर रहे थे। वह फ़ैसला ७ अगस्त को सुनाया जाना है। स्मरणीय है कि सुन्नी-समुदाय के हरीरी और अन्य २१ लोग की हत्या वर्ष २००५ में ट्रक में बम-विस्फोट कर की गयी थी, जिसके लिए शिया मुस्लिम आन्दोलन का संचालन करनेवाले संगठन ‘हिजबुल्लाह’ के सदस्यों को आरोपित किया गया था और उनके विरुद्ध मुक़द्दमा भी क़ायम किया गया था। इस कारण से शक की सुई हिजबुल्लाह की ओर भी जाती दिख रही है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि यह विस्फोट एक हमला हो सकता है।
इस घटना से लेबनान के प्रधानमन्त्री हसन दिआब भी हैरान हैं। उन्होंने ५ अगस्त को ‘राष्ट्रीय शोक’ की घोषणा की है।