● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
किसी भी क्षेत्र के ९५ प्रतिशत ठीकेदार धूर्त्त और मक्कार होते हैं। वे शुरू मे रुचि दिखाते हैं, फिर धीरे-धीरे मूर्ख बनाना शुरू कर देते हैं। जो-जो काम कराने हों, सभी को ₹१०० के स्टैम्प पेपर पर साफ़-साफ़ लिखवा लें; ठीकेदार का आधार कार्ड और घर देख लें; उसके साथ जितने भी लोग आपके निर्माणकार्य के साथ जुड़े हों, उन सभी के भी आधार कार्ड देख लें और हो सके तो घर भी। अपने मोबाइल फ़ोन से सभी के आधार कार्ड का छायाचित्र खींच लें। ठीकेदार कितने समय मे पूरा निर्माणकार्य कर लेगा और यदि नहीं कर लेगा तो उससे आप क्षतिपूर्ति किस प्रकार करवायेंगे, मिलबैठकर सब कुछ तय कर लें।
हो सके तो अपने निकटतम थाने मे ठीकेदार और सम्बन्धित सभी मिस्त्री-मज़्दूर के आधार कार्ड की प्रतिलिपि और अनुबन्धित पत्र एक आवेदनपत्र के साथ दे दें। इससे आप पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे। ठीकेदार को कराये गये काम के हिसाब से ही भुगतान करें, ताकि आगे चलकर आपको आर्थिक क्षति न पहुँचे। जब-जब ठीकेदार को जितने भी रुपये दें, उसका प्रमाण आपके पास होना चाहिए।
मै एक भुक्तभोगी हूँ, इसलिए आप सभी को सजग कर रहा हूँ। ‘मो० अनस अनवर’ (दाढ़ी रखता है।), अबूबकरपुर (धूमनगंज थानेवाले मार्ग पर), प्रयागराज नाम का यदि कोई ठीकेदार आये तो उससे सावधान रहें; वह स्वयं बेईमान है; उसके मिस्त्री-मज़्दूर चोर हैं; घर से सामान की चोरी भी करते हैं। उस ठीकेदार के विरुद्ध मैने थाने मे तहरीर भी दी थी, तब जाकर किसी तरह से मेरा निर्माण-कार्य पूरा हुआ था। जिस काम को करने के लिए उसने दो महीने की अवधि मागी थी, उसे कराने मे उसने लगभग एक वर्ष लगा दिया था।
मेरा उस धूर्त्त ठीकेदार से ‘सोशल मीडिया’ से ही सम्पर्क हुआ था।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ मई, २०२२ ईसवी।)