गर्लफ्रेंडन में नथइले तहार बबुआ

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


रात-दिन उधियइले तहार बबुआ,
करेजवा जरवइले तहार बबुआ।
ना बुझाला सुझाला ऊ बौका के अब
अन्दाजा गरई पकड़े तहार बबुआ।
खेत-खरिहान बेचले जेवरवो के ऊ,
धूरि आँखी में झोंकले तहार बबुआ।
गाँव-नगरी से नाता उधार कइलन,
सहरी छोकरी पटवले तहार बबुआ।
गाइ-भँईसी चरावे के लूर ना आवे,
खूब जामाना चरवले तहार बबुआ।
खईनी फटके के जेकर सहूर ना रहे,
मुह बाराण्डी लगवले तहार बबुआ।
जेकरा मुहवा से एको बकार ना निकले,
गिटिरपिटिर बतियवले तहार बबुआ।
मरद-मेहरारू में कइसे फरक करब?
होठ लीपीसटीक लगइले तहार बबुआ।
कइसे फरियाई मेहरिया-बेटा-में अब,
गर्लफ्रेंडन में नथइले तहार बबुआ।
मेहरारू के अँखिया में ओरहन लउके,
आँखी चसमा चढ़वले तहार बबुआ।
बाड़ा पातर मोबइलवा आवाज मारे ले,
कइसन बंसी बजवले तहार बबुआ।
ताला में बन्द कइसे करब कहनिया,
चाभी लेके उधियइले तहार बबुआ।