गीतांजलि श्री के उपन्यास रेत समाधि पर आधारित ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्‍कार

गीतांजलि श्री ने कहा कि 'टॉम्ब ऑफ सैंड' को पुरस्‍कार मिलना एक उदासी भरी संतुष्टि

हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास रेत समाधि पर आधारित ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्‍कार मिला है। ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाला किसी भी भारतीय भाषा से अनूदित पहला उपन्‍यास है। हिंदी भाषा के इस उपन्‍यास का अनुवाद किया गया है।

गीतांजलि श्री न केवल हिंदी की पहली पुरस्‍कार विजेता हैं, बल्कि यह पहली बार है कि किसी भारतीय भाषा में लिखी गयी एक पुस्‍तक ने बुकर पुरस्‍कार जीता है।

गीतांजलि श्री ने कहा कि ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ को पुरस्‍कार मिलना एक उदासी भरी संतुष्टि है। यह उस दुनिया के लिए एक शोकगीत है जिसमें हम रहते हैं। यह एक स्थायी ऊर्जा है, जो किसी भी बुरी स्थिति में आशा की किरण जगाए रखती है। गीतांजलि श्री ने कहा कि जैसे-जैसे महिला की आयु बढ़ती है उसकी सोच में भी परिवर्तन आने लगता है।