क्या बात है! लगे रहो– शानदार कारनामा!

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

हमे इन सभी लोग पर गर्व है, जो देवरिया के बड़कागाँव मे एक अध्यापक के घर मे बैठकर दूसरों की उत्तरपुस्तिकाओं मे अनेक विषयों के उत्तर लिखते हुए “रंगे हाथों” सम्मानित किये गये हैं। इन सभी को ‘भारतरत्न’ मिलना चाहिए। तोप का मुह खोलिए और दीजिए, धकाधक १०८ बार “जय श्री राम” तोप की सलामी। ये सभी कुकृत्य-योद्धा ‘संसद्’ और ‘विधानमण्डल’ मे प्रतिनिधित्व करने की अर्हता अर्जित कर चुके हैं।

बेचारे इन निर्दोष और अबोध विद्यार्थियों को हाईस्कूल के गृहविज्ञान, चित्रकला, उर्दू आदिक विषयों के प्रश्नपत्रों के प्रश्नो के उत्तर अवैध सामग्री से देखकर दूसरों के नाम की उत्तरपुस्तिकाओं मे लिखते हुए, एक ग्रामप्रधान और शिक्षक के घर मे धर-दबोचा गया है। लोकोक्ति है, “पापी पेट का सवाल है” और ‘हितोपदेश:’ मे कहा गया है, ”बुभुक्षित: किं न करोति पापम्, क्षीणा नरा: निष्करुणा भवन्ति।” को चरितार्थ करते हुए, ये दुष्कृत्य कराये गये हैं, जिसके मूल मे उत्तरप्रदेश के सम्पन्न जनपद ‘देवरिया’ के बरहज क्षेत्रान्तर्गत पैना गाँव के ‘स्व० बिन्ध्याचल इण्टर कॉलेज’ का सत्यनिष्ठ प्रबन्धक और प्रधानाचार्य तारकेश्वर गुप्ता उत्तरदायी है, जो विद्यालय मे ताले जड़कर भागा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि उपर्युक्त विद्यालय अपनी स्थापना के समय से ही बदनाम रहा है। अफ़्सोस! उस तारकेश्वर गुप्ता को अभी तक सरकार की ओर से ‘सर्वश्रेष्ठ (शुद्ध शब्द ‘श्रेष्ठ’ है।) प्रधानाचार्य’ का पदक नहीं थमाया जा सका है। ऐसे ही प्रबन्धक और प्रधानाचार्य पीढ़ियों को पीढ़ियों से सँवारते आ रहे हैं; परिणाम हम देखते आ रहे हैं– महाविद्यालयों-विश्वविद्यालयों मे अध्यापकों की कृष्णपक्ष की तरह से घटती प्रतिष्ठा।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३१ मार्च, २०२२ ईसवी।)