● बीडीओ/एडीओ के संरक्षण में वोटर लिस्टों की अनवरत जारी बिक्री, चुनाव अधिकारियों व ऊपर तक पैसा देने के नाम पर हो रही अवैध वसूली।
कोथावां (हरदोई)। जीरो टॉलरेंस व भ्रष्टाचार मुक्त सिस्टम के बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार में भी भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहराई तक जमी हुई हैं और सरकारी कार्यालयों में अधिकारी अवैध वसूली करने के लिए नित नए क्या-क्या हथकंडे अपना रहे हैं, इसका अंदाजा विकासखंड कोथावां के बीडीओ/एडीओ(पंचायत) की इस शर्मनाक करतूत को जानकर स्वयं ही लगाया जा सकता है । जहाँ इन अधिकारियों की शह व संरक्षण में ब्लॉक कर्मचारी वोटर लिस्टों की अवैध रूप से बिक्री करके प्रत्येक लिस्ट के लिए दो सौ रुपये से पांच सौ रुपये तक की अवैध वसूली कर रहे हैं।
बीडीओ कोथावां अमरेश सिंह व एडीओ पंचायत कौशलेंद्र प्रताप के संरक्षण में कर्मचारियों (सफाईकर्मी, कम्प्यूटर ऑपरेटर आदि) ने वोटर लिस्ट बेचने के इस गोरखधंधे में चुनाव अधिकारियों व जनपद स्तरीय अधिकारियों को भी शामिल करने से नहीं छोड़ा और उन्हें भी अपने कृत्य की भागीदारी में लपेट लिया। उनका कहना है कि हमें ऊपर तक ये पैसा देना पड़ता है। ब्लॉक में सुचारू रूप से जारी इस अवैध वसूली का मामला प्रकाश में तब आया जब वोटर लिस्ट में अपने नाम की पुष्टि करने गए एक जागरूक मतदाता से एडीओ पंचायत कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने वोटर लिस्ट खरीद लेने की बात कही और इसके लिए पांच सौ रुपये की मांग रखी। जब मतदाता ने इस बाबत इतना पैसा लेने की जानकारी चाही तो बताया गया कि यह पैसा ऊपर तक जाता है और साथ ही चुनाव अधिकारियों को खर्चा देने के साथ उन्हें नाश्ता आदि भी कराना पड़ता है। जागरूक मतदाता ने एडीओ पंचायत कार्यालय का यह सारा खेल अपने कैमरे में कैद कर लिया और फिर मीडिया को उपलब्ध कराया।
अधिकारियों/कर्मचारियों के इस कृत्य से निर्वाचन आयोग की निष्पक्ष भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है।चुनाव व जनपद स्तरीय अधिकारियों को खर्चा देने, नाश्ता कराने के नाम पर हो रही इस अवैध वसूली में संलिप्त अधिकारियों की बेलगाम कार्यशैली को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि इन अधिकारियों को ना तो योगी सरकार का भय है और ना ही निर्वाचन आयोग का।उक्त अधिकारी व उनके अधीनस्थ कर्मचारी अपने इस शर्मनाक कृत्य से निर्वाचन आयोग की नियमावली का जमकर मखौल उड़ाने के साथ साथ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति को भी ठेंगा दिखा रहे हैं।फिलहाल इस गंभीर प्रकरण को उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयुक्त को अवगत कराते हुए दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों पर आवश्यक वैधानिक कार्यवाई करने की अपेक्षा की गई है।
रिपोर्ट ➖ एस.बी.सिंह सेंगर