अझुवा/कौशांबी : बताते चलें कि नगर पंचायत अझुवा करीब एक दशक से भ्रष्टाचार कर विकास की रकम बंदरबांट करने के मामले मे कुख्यात रहा है जिसकी शिकायत वर्षों से समाजसेवियों द्वारा शासन तक की जाती रही है जिस पर मुख्यमंत्री जी के जनसुनवाई पोर्टल पर की गई ऐसी ही एक शिकायत संख्या 40017417005343 पर तत्कालीन अपर जिलाधिकारी कौशांबी ने पूर्व चेयरमैन प्रतिनिधि ओमप्रकाश कुशवाहा एवं उनके परिजनों द्वारा उनके कार्यकाल मे अर्जित की गई सभी संपत्तियों की जांच हेतु अपनी संस्तुति सहित पत्र दिनांक 22 जनवरी 2018 को जवाब मे पत्र संख्या 1002/टी.ए.सी.-आई.जी.आर.एस.-कौशा./2016 के द्वारा प्रेषित करते हुए शिकायत को निस्तारित करने की मांग की थी जिसके संबंध मे शिकायत का निस्तारण तो कर दिया गया परंतु शासन द्वारा मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा से क्यों नही कराई जा रही यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

आखिर शासन क्यों नही चाहता कि करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार पर ओमप्रकाश व उनके परिजनों द्वारा अर्जित आय से अधिक संपत्ति की गहन जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराते हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हो। क्या ऐसे ही भ्रष्टाचारियों द्वारा हरे नोटों की गड्डियों के बल पर ऐसे गंभीर मामलों की फाइलों को दबवाया जाता रहेगा या फिर ऐसे मामलों की स्थलीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही भी होगी यह सवाल नगर की जनता जो भ्रष्टाचार को उजागर करने की मांग लंबे समय से करती आ रही है उसके मन मे भी है।
आखिर इतने बड़े घोटालेबाजों को कौन संरक्षण दे रहा है जो किसी भी ऐसे मामले को दरकिनार कर जनता को ढ़ेगा दिखाया जाता रहा है। नगर वासियों के लिए आई विकास की योजनाएं जो अधिकांशत: लीपापोती का शिकार होकर फाइलों पर सिमट गई हैं उन फाइलों के पन्नों को खोलकर हर एक कार्य की नियमानुसार उसमे लिखे मानकों का अक्षरश: पालन करते हुए मौके पर मिलान करने की जरूरत है जिसे शासन-प्रशासन कराने से परहेज क्यों कर रहा है? क्या योगी सरकार की भ्रष्टाचार के मामलों मे जीरो टालरेंस की नीति सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है या उसे अमलीजामा भी पहनाया जाएगा? ऐसे ढ़ेर सारे सवाल विकास कार्यों से मरहूम जनता के मन मे कौंध रहा है।
नगर के लोगों ने पिछले करीब दस वर्षों मे शासन से प्राप्त एक-एक पाई सहित नगर पंचायत के निजी स्रोतों से प्राप्त कुल धनराशि के खर्चों की स्थलीय, भौतिक एवं नगर के लोगों से पूंछताछ कराते हुए विधिवत जांचकर दोषियों से सरकारी धन की रिकवरी कराए जाने की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से की है।