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अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब और सिंगापुर ने महामारी में मदद के लिए आगे बढ़ाया हाथ

कोरोना की दूसरी लहर झेल रहे भारत को मिला दुनिया का साथ

कोरोना के प्रारंभिक दौर में दुनिया के लिए संकटमोचक बनकर उभरा था भारत

26 अप्रैल, नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इस मुश्किल घड़ी में अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब और सिंगापुर समेत कई देशों ने कोरोना का कहर झेल रहे भारत की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। इन देशों का भारत की सहायता के लिए आगे आना कोरोना की पहली लहर के दौरान भारत द्वारा चलाई गई ‘औषध कूटनीति’ की सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिका ने हटाया प्रतिबंध
कोरोना ने जिन देशों पर सबसे ज्यादा प्रभाव डाला उनमें भारत के साथ-साथ अमेरिका भी शामिल है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए आवश्यक कच्चे माल के निर्यात पर रोक लगाकर भारत को बड़ा झटका दे दिया था। यह मामला उस समय सुलझता दिखा जब भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलविन से बातचीत की। इसके बाद अमेरिका अपने प्रतिबंध वाले फैसले से पीछे हट गया। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी रविवार को ट्वीट कर भारत को मदद का भरोसा दिया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि ”महामारी की शुरुआत में जब हमारे अस्पतालों पर भारी दबाव था उस समय भारत ने अमेरिका के लिए जिस तरह सहायता की थी, उसी तरह भारत की जरूरत के समय में मदद करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।”

80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भेज रहा सऊदी अरब
भारत के लिए मुश्किल की इस घड़ी में मित्र राष्ट्र सऊदी अरब भी आगे आया है। सऊदी अरब और भारत के बीच 80 मीट्रिक टन जीवन रक्षक गैस ऑक्सीजन को लाए जाने पर सहमति बन गई है। ऑक्सीजन को भेजने का काम अडानी समूह और लिंडे कंपनी के सहयोग से हो रहा है। रियाद स्थित भारतीय मिशन ने ट्वीट किया, ”भारतीय दूतावास को अति आवश्यक 80 मीट्रिक टन तरल ऑक्सीजन भेजने के मामले में अडानी समूह और एम/एस लिंडे के साथ साझेदारी करने पर गर्व है। हम हृदय से सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्रालय को सभी तरह की मदद, समर्थन और सहयोग के लिए धन्यवाद देते हैं।’’

600 मेडिकल उपकरण भेजेगा ब्रिटेन
महामारी की दूसरी लहर का सामना कर रहे भारत के लिए ब्रिटेन ने भी मदद की बात कही है। ब्रिटेन ने रविवार को वेंटिलेटर और ऑक्सीजन संकेंद्रक समेत अन्य जीवन-रक्षक चिकित्सा उपकरण भेजने की घोषणा की। दिल्ली स्थित ब्रिटिश उच्चायोग ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से निपटने में सहायता के लिए 600 मेडिकल उपकरण भारत भेजे जाएंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा, ‘कोरोना वायरस से लड़ाई के इस कठिन समय में हम मित्र एवं साझेदार की तरह भारत के साथ खड़े हैं।’

सिंगापुर ने भेजा क्रायोजेनिका कंटेनर
कोरोना की खिलाफ लड़ाई में भारत की मदद के लिए आगे आए सिंगापुर ने चार क्रायोजेनिका कंटेनरों को भारत भेजा है। इन कंटेनरों को भारतीय वायुसेना के विमान से शानिवार को देश में लाया गया। इनका इस्तेमाल ऑक्सीजन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए किया जाएगा। सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त पी कुमारन ने कहा कि आने वाले दिनों में इस प्रकार के और कंटेनर भारत को भेजे जा सकते हैं। ”हम दुनिया के किसी भी हिस्से से अधिक से अधिक क्रायोजेनिका ऑक्सीजन कंटेनरों को पाने का प्रयास कर रहे हैं।”

ईयू भी आया आगे
27 देशों के शक्तिशाली समूह यूरोपीय संघ (ईयू) भी भारत की मदद के लिए तेजी से संसाधन जुटा रहा है। ईयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईयू ने पहले ही अपनी नागरिक रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया है ताकि भारत को तत्काल ऑक्सीजन और दवा आपूर्ति सहित अन्य मदद की जा सके। ईयू भारत के लोगों के साथ ‘पूरी एकजुटता’ के साथ खड़ा है।

जब दुनिया की मदद के लिए भारत ने बढ़ाया था हाथ
दुनिया के बड़े देशों का इस तरह से भारत की मदद के लिए आगे आना भारत की ‘औषध कूटनीति’ सफलता को बताता है। कोरोना के प्रारंभिक दौर में दुनिया के लिए भारत संकटमोचक बनकर उभरा था। उस समय भारत ने अमेरिका समेत 150 से अधिक देशों को कोरोना के उपचार में सहायक हाइड्रोक्लोरोक्विन दवा भेजी थी। इसके साथ ही भारत की तरफ से ‘सार्क कोविड-19 इमरजेंसी फंड’ में 2.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि की आवश्यक दवाएं, चिकित्सा उपभोग्य सामग्री, कोविड सुरक्षा और टेस्टिंग किट तथा अन्य उपकरणों की आपूर्ति भी उपलब्ध कराई गई थी। यही नहीं इस संकट काल में भारत ने ‘वैक्सीन मैत्री’ अभियान चलाकर कई देशों की मदद की थी। इस अभियान के तहत मात्र दो माह में भारत ने विश्व के 73 देशों को कोरोना रोधी वैक्सीन का 596.59 लाख टीका दे दिया था।

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