भारत के ‘आरम्भिक’ और ‘मध्यम क्रम’ के बल्लेबाज़ों ने ‘भारत’ को हराया!..?

अभी-अभी
‘भारत-इंग्लैण्ड टेस्ट-श्रृंखला’
प्रथम टेस्ट मैच


डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (क्रीड़ा-समीक्षक)


आज (४ अगस्त, २०१८ ईसवी) बर्मिंघम (इंग्लैण्ड) में खेले गये भारत के आरम्भिक और मध्यम क्रम के बल्लेबाजों के दोनों पारियों में निराशापूर्ण प्रदर्शन से पाँच मैचों की श्रृंखला के अन्तर्गत प्रथम टेस्ट मैच में भारत इंग्लैण्ड से ३१ रनों से पराजित हो चुका है। इस प्रकार इंग्लैण्ड ने श्रृंखला में १-० की अग्रता अर्जित कर ली है। यद्यपि विकेट पर गेंद अन्दर आते हुए उछाल ले रही थी, जिससे भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए बहुत कठिनाइयाँ हो रही थीं तथापि आत्मविश्वास के साथ धैर्यपूर्वक विकेट पर टिके रहने की योग्यता प्रदर्शित करनी चाहिए थी। कठिनाइयाँ तो इंग्लैण्ड के बल्लेबाज़ों के लिए भी हो रही थीं; किन्तु उसके कुछ बल्लेबाज़ ठहरकर गेंद की प्रकृति को समझते हुए खेल रहे थे। भारत के अधिकतर बल्लेबाज़ यही नहीं समझ पा रहे थे कि किस गेंद को खेलें और किसे छोड़ें। हार्दिक पाण्ड्या अन्त समय तक जूझते रहे; परन्तु बाहर की ओर जाती एक गेंद के साथ छेड़ख़ानी करने का नतीजा भुगतना पड़ा। वे उस गेंद को छोड़ सकते थे।
मुरली विजय, शिखर धवन, के०एल० राहुल, अजिंक्य रहाणे तथा दिनेश कार्तिक प्रभावहीन रहे, जो कि शोचनीय है।

एक तरह से भारतीय बल्लेबाज़़ों ने इंग्लैण्ड के गेंदबाज़ों के सम्मुख आत्मसमर्पण कर दिया था। भारतीय कप्तान विराट कोहली दोनों पारियों में अकेले दम पर एक सुदृढ़ दीवार की तरह से खड़े रहे। यही कारण है कि प्रथम पारी में शतक और द्वितीय पारी में अर्द्धशतक बनाये थे।
इंग्लैण्ड और भारत की ओर से गेंदबाज़ों ने अत्यन्त प्रभावकारी गेंदबाज़ी की थी। भारत के तीव्र गेंदबाज़ ईशान शर्मा और उमेश यादव तथा एकमात्र फिरकी गेंदबाज़ आर० अश्विन ने शानदार गेंदबाज़ी की थी, जबकि इंग्लैण्ड के गेंदबाज़ सैम करन, एण्डर्सन, स्टोक तथा अली का प्रदर्शन प्रभावकारी रहा।

इंग्लैण्ड के हरफ़नमौला सैम करन को ‘मैन ऑव़ द मैच’ का पुरस्कार दिया गया।

इंग्लैण्ड प्रथम पारी : २८७ और द्वितीय पारी : १८०; भारत प्रथम पारी : २७४ और द्वितीय पारी : १६२
अब पुजारा, रवीन्द्र जडेजा तथा बूमरा को द्वितीय टेस्ट मैच में लाया जा सकता है। कुलदीप यादव पर भी विचार किया जा सकता है।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ४ अगस्त, २०१८ ईसवी)