मसुरिया दीन मौर्य :
सिराथू, कौशाम्बी : वैश्विक कोरोना महामारी संकट के कर्मचारियों की कमी के चलते छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ थप होने से बेरोजगारों का रोजगार छिन गया। अन्य राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर महामारी व भुखमरी से बचने के लिए अपने घर वापस आ गए। परिवार का पालन पोषण करने के लिए खेती करना शुरू कर दिया। लेकिन जनपद कौशाम्बी की किसान सेवा सहकारी समितियों में खाद समय से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कहीं सहकारी समितियों के सचिव व कर्मचारियों की मनमानी के चलते ताले लटकते मिलते हैं और कहीं समितियां खुली रहती हैं।
कतार में लगे किसानों को खाद न होने का हवाला देकर बिना खाद के वापस कर दिया जाता है। केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों को अन्नदाता का दर्ज देती है। लेकिन अन्नदाता किसान की दुर्दशा पर कोई अधिकारी ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा है।
विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि समितियों में खाद आने के पहले ही कर्मचारियों द्वारा निजी खाद विक्रेताओं के यहाँ बेच दिया जाता है। सहकारी समितियों के अधिकारी व कर्मचारियों के बीच कलाबाजारी के रुपए को बंदरबाट कर लिया जाता है। समितियों में खाद नहीं मिलने के बाद मायूस किसान धान की फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए बाजारों में खुली निजी खाद विक्रेताओं से लेने को विवश हो जाते हैं।
जिले में पत्रकारों की टीम ने किसानों की दशा जानने के लिए भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान सिराथू, देवीगंज, शहजादपुर टेढ़ी मोड़, कल्यानपुर, चाकवन, मूरतगंज, भरवारी, करारी, मंझनपुर,ओसा, टेवा बाजार,अजुहा, डोरमा, उदिहिन के किसानों की दर्द भरी दास्तां जानने की कोशिश किया। खाद की किल्लत से परेशान किसानों ने कहा कि यदि समितियों में खाद समय से उपलब्ध नहीं कराई गई तो उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ जी की सरकार के विरुद्ध जनपद के किसान धरना प्रदर्शन करने को विवश हो जायेंगे।