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बोलो जय श्री राम

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
राम-नाम तो आड़ है, काम दिखे बेकाम।
बेच रहे हैं देश को, बोलो जय श्री राम।।
दो–
दिखता नक़्ली काम है, और न अस्ली चाम।
ठगते आये देश को, बोलो जय श्री राम।।
तीन–
मूल विषय से हट रहे, सुन लो यह पैग़ाम।
जनता करवट ले रही, बोलो जय श्री राम।।
चार–
मिहनत करते लोग हैं, मिले न उनको दाम।
आँसू बारिश-सा दिखे, बोलो जय श्री राम।।

पाँच–
कलाकार हैं दिख रहे, रंगमंच के नाम।
रामभरोसे देश है, बोलो जय श्री राम।।
छह: —
कितना पिछड़ा देश है, दिखते नमकहराम।
गिद्ध दिख रहे हर तरफ़, बोलो जय श्री राम।।
सात–
नारी हर दिन लुट रही, दिखते सब बेकाम।
रावण घर-घर दिख रहे, बोलो जय श्री राम।।
आठ–
महँगाई की मार से, होते लोग तमाम।
भारत भूखा सो रहा, बोलो जय श्री राम।।
नौ–
न्यू इण्डिया बहक रहा, भारत हुआ ग़ुलाम।
शातिर-मण्डी सज गयी, बोलो जय श्री राम।।
दस–
कितना दिखता बेरहम, कलियुग का है राम।
सीता को है छल रहा, बोलो जय श्री राम।।
ग्यारह–
जीवन नरक बना रहा, ले विकास का नाम।
भस्मासुर-सम दिख रहा, बोलो जय श्री राम।।
बारह–
क्या सही और क्या ग़लत, कभी छाँह औ’ घाम।
नाच रहे नंगे हुए, बोलो जय श्री राम।।
तेरह–
नहीं याद किसान की, बातें होतीं आम।
महँगाई सुरसामुखी, बोलो जय श्री राम।।
चौदह–
सभी आँकड़े रो रहे, दिखते सब बेदाम।
सरकारी सब खेल है, बोलो जय श्री राम।।
पन्द्रह–
डर के मारे मौन हैं, पढ़े-लिखों के धाम।
रामनाम अब सत्य है, बोलो जय श्री राम।।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३१ जनवरी, २०२२ ईसवी।)