“दुनिया याद करे कल तुझको, कुछ तो ऐसा करता चल”
रामलीला प्रांगण, तुलाराम बाग़, इलाहाबाद में डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की अध्यक्षता में नवसंवत्सर के अवसर पर १८ मार्च, २०१८ ई० को लल्लन टाप कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कविगण ने बहु रस से श्रोताओं का मनविभोर किया।
वन्दना शुक्ल ने सुनाया– वो डरती नहीं है, डराने लगी हो, ग़ज़ब के वो तेवर दिखाने लगी है।
डॉ० प्रदीप चित्राशी ने “पत्नी जी जेलर बनीं, सरहज पहरेदार। होली फीकी हो गयी, बिन साली दीवार।” सुनाकर वाहवाही लूटी।
संचालन करते हुए शिवराम उपाध्याय ‘मुकुल मतवाला’ ने सुनाया– हर साँस अनमोल है तू मोल सभी की करता चल। दुनिया याद करे कल तुझको कुछ तो ऐसा करता चल।
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने ग़ज़ल पेश की– ख़ता गर क़ुबूल हो तो कहो नफ़ासत लिख दूँ, पयामे इश्क़ के नाम इक वरासत लिख दूँ।
डॉ० वीरेन्द्र तिवारी की रचना थी– ज़माना है बुरा फिर भी यहाँ अच्छे भी मिलते हैं, है काँटों से भरे उपवन, सुमन उनमें भी खिलते हैं।
डॉ० इन्दुप्रकाश मिश्र ने सुनाया– हम तुम्हारे तुम हमारे इतनी ही सी बात है, आधा जीवन दिन हमारा आधा जीवन रात है।
विवेक सत्यांशु ने सुनाया– आज के ज़माने में कुत्ते का भौंकना, आदमी के भौंकने से ज़्यादा अहमियत रखता है।
इनके अतिरिक्त तलब जौनपुरी, नज़र इलाहाबादी तथा के० पी० गिरी ने अपनी कविताएँ सुनायीं।
अरुण कुमार श्रीवास्तव ने सम्मेलन का संयोजन किया।