नई दिल्ली। भारत सरकार विदेश में भारतीय स्टूडेंट्स के हितों और भलाई की सुरक्षा को बहुत प्राथमिकता देती है। सरकार ने पार्टनर देशों के साथ माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट (एमएमपीए) के रूप में इंस्टीट्यूशनल बाइलेटरल कोऑपरेशन किया है। यह एग्रीमेंट भारतीय स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स को विदेश जाने में कानूनी मदद देने का फ्रेमवर्क बनाता है, जिससे उनकी सेफ्टी, सिक्योरिटी और वेलफेयर पक्का होता है।
विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि कई देशों के साथ हुए एमएमपीए से विदेश में पढ़ाई की चाहत रखने वालों की राह आसान हुई है। दरअसल आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक कुमार मित्तल ने सवाल पूछा था कि विदेश में स्टूडेंट्स की सुरक्षा और पढ़ाई जारी रखने के लिए सरकार होस्ट देशों के साथ नए बाइलेटरल फ्रेमवर्क पर कैसे बातचीत कर रही है। सिंह ने विदेश मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने जवाब में बताया कि अभी तक सरकार ने सात देशों के साथ माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट किया है, जिनमें फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, इटली और डेनमार्क शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा पार्टनर देशों के साथ एमएमपीए का मकसद स्टूडेंट्स के लिए वीजा प्रोसेस को आसान बनाना, स्टूडेंट मोबिलिटी को बढ़ाना, हायर एजुकेशन के मौकों को बढ़ावा देना और साथ ही अलग-अलग तरीकों से पढ़ाई के बाद के रास्ते को आसान बनाना है, जिसमें टेम्पररी वर्क परमिट जारी कराने में सहायता करना भी शामिल है। उन्होंने बताया कि भारतीय मिशन विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे भारतीय स्टूडेंट्स के साथ रेगुलर संपर्क बनाए रखते हैं। एम्बेसी के अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली यूनिवर्सिटी और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में भी जाते हैं, ताकि इंडियन स्टूडेंट्स और स्टूडेंट एसोसिएशन से बातचीत कर सकें और कोर्स की क्रेडिबिलिटी या क्वालिटी से जुड़े किसी भी मुद्दे का पता लगा सकें।
कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा इमरजेंसी के दौरान भारत सरकार ने स्टूडेंट्स सहित इंडियन नागरिकों को बचाने और घर लाने के लिए बड़े पैमाने पर इवैक्यूएशन ऑपरेशन किए हैं। हाल के खास इवैक्यूएशन ऑपरेशन में ऑपरेशन देवी शक्ति (अफ़गानिस्तान), ऑपरेशन गंगा (यूक्रेन), ऑपरेशन कावेरी (सूडान), ऑपरेशन अजय (इजरायल) और ऑपरेशन सिंधु (इजरायल तथा ईरान) शामिल हैं। ये कोशिशें विदेश में पढ़ रहे इंडियन स्टूडेंट्स की सुरक्षा और भलाई पक्का करने और उन्हें शरारती तत्वों तथा असुरक्षित सुरक्षा स्थितियों से बचाने के लिए मिनिस्ट्री के कमिटमेंट को दिखाती हैं।
(रिपोर्ट– शाश्वत तिवारी)
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