कोथावां की सबसे बड़ी ग्रामसभाओं में शुमार जनिगांव के मजरा मालपुर में सरकार की कोई योजना नहीं पहुँची। कच्चे घरों की दीवारों के नीचे मरते गरीबों व उनके बच्चों को देखकर भी शासन प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही । यहां भी गरीबों के मरने की राह देखी जा रही है, यहां के हालात देखकर ऐसा ही लगता है ! क्योंकि जर्जर मकानों में छप्पर, टिन, पन्नी आदि डालकर रह रहे लोगों को देखने वाला कोई नहीं।
सरकार की किसी भी योजना का क्रियान्वयन इस गांव में अभी तक देखने को नहीं मिला है । चाहें वह स्वच्छता मिशन के तहत साफ सफाई हो या खुले में शौच मुक्त की छलावा योजना के तहत शौचालय हों । सभी ग्रामीण गन्दगी व कीचड़ युक्त गलियों, बजबजाती कच्ची व रूंधी नालियों से भरी गन्दगी में रहने को विवश हैं । लेकिन शासन प्रशासन इसमें भी भयंकर बीमारी फैलने की रास्ता देख रहा है ।
गांव की सारी गलियां व सड़कें तो टूटी फूटी व जर्जर हैं ही मुख्य मार्ग से मालपुर के पुरवा जाने वाले कच्चे मार्ग की पुलिया भी टूटी पड़ी है । मालपुर के मुख्य मार्ग जलमग्न व कीचड़ युक्त हैं । अतरौली रोड से गांव तक आया सड़क मार्ग भी ध्वस्त है जिस पर ना तो गड्ढे भरे गये और न ही मरम्मत कार्य हुआ है । गांव में पानी निकास की ड्रेन भी कच्ची होने के साथ मन्दिर और मस्जिद के रास्ते भी नहीं बने हैं । हिन्दू-मुस्लिम बस्ती में लोग वोट के नाम पर ग्रामीणों को ढगते रहे लेकिन विकास के नाम पर ग्रामीणों की हालत कोई देखने वाला नहीं । खम्भों पर मरकरी लाइट न लगने से चारों तरफ अंधेरा रहता जिससे चोरी आदि का खतरा हमेशा बना रहता है। गांव के निकट जलालपुर में सरकारी बोरिंग भी कागजों पर चल रही है । जिसके लिए गांव के लोगों ने कई बार सिंचाई विभाग को लिखा लेकिन टाल मटोल के चलते कार्यवाही नहीं की जा रही है । ग्रामवासी सिंचाई का साधन न होने से खेती नहीं कर पा रहे । जिससे ज्यादातर किसान भुखमरी की कगार पर हैं ।
इतना सब होने के बाद भी बार बार राशन कार्डों का खतम किये जाने, यूनिट काटने आदि के चलते कोटेदार भी इन्हें राशन नहीं देता और हर बार राशन कार्ड बनवाने के नाम पर गरीब मजदूर किसान 300 से 500 रू के चढ़ावे को विवश हैं । ग्रामीण महिलाओं माया, सताना, सरबजीत, निशा, अनीता, समीरा, सुशीला, पूनम, सहेली, गीता, सुंदरी, जगदेई, सावित्री, रामकली, कमला, संगीता, चन्द्रावती, जाहिरा, कमला, खातून, रामदेवी, फुलकोरा, कैलाशा, साहीन, फरीदा, जरीना, मुन्नी, रेशमा, महदेई, रिंकी, सोनमती, नन्ही, राममूर्ति, बसन्ती, शबाना, नूरजहां, हसीन जहां, रुबीना बानो आदि सैंकड़ो महिलाओं ने शासन प्रशासन से समस्याओं की जांच कर लोगों को आवास, शौचालय, सड़क, नाली, रास्ते व खम्भों पर मरकरी आदि की मांग की है।