कोथावाँ प्रा०वि० का हाल, बच्चों को दूध और फल नहीं दे रहे जिम्मेदार

उत्तरप्रदेश के मुख्यमन्त्री के चार साल : प्रश्नों के घेरे में

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल के चार वर्ष पूरे हुए हैं।

उपलब्धियाँ :–
१- रिश्वतख़ोरी, दलाली, भ्रष्टाचार तथा अनियमितताएँ चरम पर।
२- बेरोज़गारी दूर करने और सस्ती स्वास्थ्य-सुविधा के प्रति सरकार उदासीन।
३- शिक्षा, परीक्षा तथा नियुक्तियों के प्रति सरकार की शिथिलता।
४- नृशंस अपराध, सामूहिक दुष्कर्म तथा महँगाई : दिन-दूना-रात चौगुनी।
५- नव-नियुक्त कर्मचारियों, विशेषत: सहायक अध्यापकों को वेतन से वंचित रखा गया है।
६- बदले की राजनीति चरम पर।
७- ‘हिन्दुत्व’ की राजनीति को ‘वोटबैंक’ बनाया गया है।
८- योग्यता की उपेक्षा कर चाटुकारों और कुपात्रों को अवसर दिया जाता रहा है।
९- बेरोज़गार अभ्यर्थियों के ‘बैंक ड्राफ़्ट’ से राजस्व में अभिवृद्धि करते हुए, परीक्षाओं का टालना अथवा अनियमितता, कदाचार के प्रकरणों में उलझाकर अभ्यर्थियों के मूल धन को सरकार के पक्ष में सुरक्षित कर, ब्याज का सुख भोगना।
१०- अपने न्यायिक अधिकारों की संरक्षा के लिए शान्तिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे लाखों महिला-पुरुष अभ्यर्थियों पर अपनी पुलिस से लाठियाँ बरसाना।
११- समुचित कठोर और सत्यनिष्ठ कार्यवाही न कर, परीक्षाओं में घोटाले करनेवाले अपराधियों के मनोबल को बढ़ाना।
१४- विद्यार्थियों की सम्पूर्ण ऊर्जा को ‘न्यायालय’ में चक्कर लगवाते-लगवाते उन्हें कुण्ठित कर अपना उल्लू सीधा करते रहना।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १९ मार्च, २०२१ ईसवी।)