मन लालच से दूर रख, याद करो श्री राम

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

रामभूमि के नाम पर, जुटने लगा समाज।
छोड़ गये हैं राम जो, कौन करेगा काज?
राजनीति में राम हैं, नहीं सत्य का मेल।
विफल मनोरथ दिख रहे, दिखता केवल खेल।।
राम कहाँ हैं रह गये, परछाईं पर हाथ।
पापी आँख अशक्त है, निर्बल के हैं साथ।।
भक्त बने हो माँग लो, हर ले जन की पीर।
घड़ी परीक्षा आ गयी, क्यों खोते हो धीर?
साधु-सन्त अब हैं नहीं, करते सब पाखण्ड।
राम हृदय में वास है, आदि-अनादि अखण्ड।।
सूखी रोटी प्रेम की, भोग लगाओ राम।
मन लालच से दूर रख, याद करो श्री राम।।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ४ अगस्त, २०२० ईसवी)