संजय सिंह, सांसद, आप ने पेयजल एवं स्वच्छता मिशन पर उठाए सवाल! | IV24 News | Lucknow

फ़क़त पर्द: के लिए पर्द: तो क्या पर्द:?

चन्द अश्आर

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
चिलमन गिराओ-उठाओ कोई फ़र्क़ नहीं,
निगाहों से गुफ़्तुगू कर तीरे नज़र लौटे हैं।
दो–
हमीँ ने दिया पर्द: तो हमीँ से पर्द:, क्यों पर्द:?
फ़क़त पर्द: के लिए पर्द: तो फिर क्या पर्द:?
तीन–
मैं जीभर गुनहगार रहा उनकी निगाहों में,
उनकी करनी मेरी पलकों ने ढाँप रखे हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ५ अगस्त, २०२० ईसवी)