— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
राम विराजित हो गये, बन्द हुआ अध्याय।
उन्मादी व्यवहार से, किसने क्या है पाय?
राम-आचरण ग्रहण कर, सबको लाओ पास।
रामराज संकल्प है, श्रद्धा और विश्वास।।
करते पूजन भूमि का, मनमन्दिर से दूर।
हिन्दू-मुसलिम भेद कर, बन जाते सब सूर।।
क्या पायेगा बावरे! दुनिया सेमर फूल।
आज दिख रहे राम हैं, कल जायेगा भूल।।
रामनाम तो सार है, ग्रहण करो सब आज।
ऊर्जा ले आगे बढ़ो, और सँवारो काज।।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ५ अगस्त, २०२० ईसवी)