— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
जो भी मुक़द्दर की बात करता है,
वह शख़्स ताउम्र लड़खड़ाता है।
जुल्मो सितम से जो डर जाता है,
ज़िन्दगी की ज़ंग में हार जाता है।
आईन: ने ग़द्दारों से दोस्ती कर ली,
जब भी देखता हूँ, चिटक जाता है।
वह कटा-कटा कुछ हम खिंचे-खिंचे,
दिल क़रीब आने से हिचक जाता है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय; प्रयागराज ११ जुलाई, २०२० ईसवी)