कविता – तुम और मैं

जयति जैन ‘नूतन’ –

हां तुम्हारी बातें करती है मुझे परेशान
और मैं बेहद परेशान हो जाती हूं,
कुछ देर खुद से झगड़ लूं
तो बेहद शांत हो जाती हूँ ।
मुझे पता है तुम्हें पसंद नहीं
मेरे संग बातों की महफ़िल सजाना,
मैं हूं तुम्हारी जिंदगी में बेवजह
इस बात को मुझे सच सच बताना। 
मेरी बातों को कभी ध्यान से तुम सुन सको
इतना समय भी नहीं है तुम्हारे पास,
तुम कभी गुस्से में मुझसे उलझ सको
इतनी नहीं हूं मैं तुम्हारी खास।
तुम्हें तब भी फर्क नहीं पड़ता
जब मैं अक्सर रूठ जाती हूं
पर मैं सच कहूं तुम्हें देखकर मैं, 
अक्सर खुद से उलझ जाती हूं।
आ कुछ देर मेरे साथ बैठ
मैं तुझे दिल का हाल सुनाती हूँ
तुम्हें पसन्द ना आये कुछ तो बताना
मैं खुद को भी दोषी ठहराती हूँ।
खामियां यूं तो बहुत हैं मुझमें
पर मैं कहने से भी नहीं कतराती हूँ।

पता- जयति जैन ‘नूतन’, 441, सेक्टर 3, शक्तिनगर भोपाल, BHEL. पंचवटी मार्केट के पास (462024)