शिवांकित तिवारी “शिवा” युवा कवि एवं लेखक सतना (मध्यप्रदेश) संपर्क :-7509552096-

नजर में फिर नजर नहीं आया नजर लगाने वाला ।
आख़िर पकड़ा गया वो दरिंदा शहर जलाने वाला,
खुद को खुदा मानकर बिना खौफ के जीने वाला ।
भरोसा उसका भी टूटा जो, कभी भरोसे की मिशालें देता था,
नफरतों के शहर में रहने वाला, जब पहुँचा मोहब्बत के शहर में एक दिन,
नींद से जाग ही गया आख़िर, वो गहरी नींद से सबको जगाने वाला,
खुद से ही नफ़रत कर बैठा उस दिन से वो नफरतों को उगाने वाला ।
प्यार को व्यापार समझने वालों प्यार की कद्र किया करो,
बड़ी मुश्किल से मिलता है प्यार करने और निभाने वाला ।
धर्म, जाति, मजहबों के नाम पर अब लड़ना बंद करो,
हमें आपस में लड़ा कर मजे लेता है फिर वो उकसाने वाला ।
इस जहां आये हो तो काम ऐसा कुछ कर चलों,
कि याद रखें हमेशा ये जहां और जहां में फिर आने वाला ।
मर गया एक दिन फिर खुद को खुदा बताने वाला ।।