एक अभिव्यक्ति : चादर की सलवटें अब बेबाक होने को हैं

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

हमारी बात हम तक रहे तो बेहतर है,
हमारा साथ हम तक रहे तो बेहतर है।
चादर देखकर हम पाँव हैं पसारा करते,
हमारा ख़्वाब हम तक रहे तो बेहतर है।
जनाब! आप तो हमारे पक्के रक़ीब ठहरे,
हमारा हबीब हम तक रहे तो बेहतर है।
चादर की सलवटें अब बेबाक होने को हैं,
हमारी रात हम तक रहे तो बेहतर है।
बहुत सलीक़े से मुहब्बत से बात होती है,
नफ़रत की बात हम तक रहे तो बेहतर है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ३० मार्च, २०१८ ई०)