
जयति जैन “नूतन”, भोपाल (युवा लेखिका , सामाजिक चिंतक)
पिता ही तो थे वो
जिन्होनें हर ख्वाहिश पूरी की थी
कोई क्या समझ सकेगा
उस स्नेह से भरे अगाध प्रेम को ।
वर्षों तक पसीने से सींचा
उस नन्हीं पौध को
आज जो हवा के रुख के साथ
अपनी शाखाएं उड़ने देने को तैयार
ठंडी फुहार की तरह
रिमझिम बरसने को तैयार है ।
प्रेम ही तो था
जो संस्कारों में समाया
जिसने झुकना सिखाया
हर उस जगह जहां वक़्त की नजाकत
जहां रिश्तों को संभालने की जिम्मेदारी
और आगे बढ़ने की चाह थी ।
पिता ही तो थे
जिनके गुस्से में परवाह झलकती थी
आंसू आने पर दिल पिघल जाता था
गोद में नाजुक गुड़िया समझ जिसे
उठाया, हवा में उछाला था
पंख फैलाने की आजादी देकर ।
जुदाई की रश्म भी शामिल थी
समाज के रीति रिवाजों में
हाथ पीले क्या हुये सब छूट गया
वो घर आंगन, वो अल्हड़पन
समझदारी का पाठ पढ़ाया जिसने
वो पिता ही तो थे ।।।
स्थायी पता- जयति जैन “नूतन “, 441, सेक्टर 3 , शक्तिनगर भोपाल , पंचवटी मार्केट के पास ! pin code – 462024