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खुशियों से भरा रहे दामन, पति होकर यही मनाऊँ मैं

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’

करवा चौथ व्रत की पूर्व सन्ध्या पर धर्मपत्नी को समर्पित सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ कीमौलिक रचना-


प्रिय अर्धांगिनी क्या दे दूं, जो तुमको खुश कर पाऊँ मैं।
जो करवा चौथ का ब्रत रखा, कैसे आभार जताऊँ मैं।।
मैं सरस्वती का वरद पुत्र, बस शब्द हार दे सकता हूं।
बिन मोल मिले अनमोल रतन, वह प्यार तुम्हें कर सकता हूं।।
माना हर दिन की दिनचर्या, बिन तेरे निभा न पाऊँ मैं।
प्रिय…………………………………………………….।।

मुझ गैर व्यक्ति का हांथ थाम, तुम जबसे घर में आई हो।
माना परिवार मेरा कुनबा, सबके दिल जगह बनाई हो।।
रखती हो सबका ख्याल बहुत, पर तेरा नहीं रख पाऊँ मैं।
प्रिय………………………………………………………..।।

तेरे शौक और श्रंगार निराले, परिस्थिति संग में ढल जाती हो।
जितनी व्यवस्था पास हमारे, उतने में ही खुश रह जाती हो।।
ऐशो-आराम मिले न मिले, कहती हो दूर न जाऊँ मैं।
प्रिय…………………………………………………………..।।

‘परदेशी’ कहे बच्चों की मम्मी, तुमसे तो गहरा नाता है।
दुनिया में तुमसा कोई नहीं, होगा ना मुझे दिखाता है।।
खुशियों से भरा रहे दामन, पति होकर यही मनाऊँ मैं।
प्रिय……………………………………………………………।।


रचना- सुधीर अवस्थी ‘परदेशी‘
पत्रकार-हिन्दुस्तान (बघौली, हरदोई), कवि/लेखक, हस्तरेखा विशेषज्ञ
रचना समय-07ः43 सांय, दिन- शुक्रवार, दिनांक-26.10.2018 स्थान- हमारा पम्प बघौली, अमित