योगेश समदर्शी (हास्य एवं ओज कवि)-
गाँव बस खेत वालों का कभी भी नहीं रहा
गाँव के लिए धोबी, कहार भी जरूरी थे ।
नाई और धीमर व बढ़ई जुलाहा सभी
गावँ की व्यवस्था में कुम्हार भी जरूरी थे ।
भड़बुजों के बिना भी गाँव नहीं बनता था
गाँव के लिए तो चर्मकार भी जरूरी थे ।
जितना जरूरी लाला, उतना ही जमादार
पंडित सुनार व लुहार भी जरूरी थे ।