ईहे कहाला भोजपुरी; सुनी सभे

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

अँखिया के कजरा हेराइ गइले सजनी,
हाथवा के मेहँदी खियाइ गइले सजनी।
अजोरिया मे लौके हर ओरिया अन्हरिया,
एहि घरवा दियवा बुताइ गइले सजनी।
जोहत रहि गइनी चनरमा के चननिया,
एही तरी अँखिया सुखाइ गइले सजनी।
कवन खेल खेलली ऊ बनके चकचोन्हर,
अँखिया के पनिया मराइ गइले सजनी।
लउकली ऊ बाड़ा सुघर-सागर बबुनी,
लउ लगवले अचके धराइ गइले सजनी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ४ फरवरी, २०२२ ईसवी।)