क्या भरोसा है कल मैं रहूं न रहूं

पवन कश्यप (युवा गीतकार, हरदोई)-


आपके दिल में क्या है बता दीजिये,

क्या भरोसा है कल मै रहूं न रहूं।

जिन्दगी एक उड़ती पतंग बन गई,

थाम लो डोर तुम फिर मिलूं न मिलूं ।।

तुम सरोवर में खिलता हुआ एक कमल,

मैं तो पतझड़ में गिरता हुआ पात हूं,

तुम हिमालय से निकली हुई औषधी,

मैं तो जलते हवन कुण्ड की राख हूं,

मेरे इस गीत का भाव पढ़ लीजिये,

क्या पता कल मैं कविता लिखूं न लिखूं ।

आपके दिल में क्या है बता दीजिये,

क्या भरोसा है कल मैं रहूं न रहूं ।

जिन्दगी एक उड़ती पतंग बन गई,

थाम लो डोर तुम फिर मिलूं न मिलूं ।।

एक पल रुकने का तुम इशारा करो,

रोक दूं मैं धरा को तुम्हारे लिये,

देख कर ये मिलन चांद रुक जायेगा,

सारी दुनियां रुकेगी तुम्हारे लिये,

रोक दो प्रेम के आज रथ को यहां,

क्या पता फिर गुजारिश करुं न करुं ।

आपके दिल में क्या है बता दीजिये,

क्या भरोसा है कल मैं रहूं न रहूं ।

जिन्दगी एक उड़ती पतंग बन गई,

थाम लो डोर तुम फिर मिलूं न मिलूं ।