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बाल दिवस विशेष : बच्चों​ की मस्ती

शालू मिश्रा, (युवा साहित्यकार/अध्यापिका)
नोहर (हनुमानगढ), रा.बा.उ.प्रा.वि.सराणा, (जालोर)

हम बच्चों की
यारी ऐसी,
देखत देशी
और विदेशी |
मन करत है हमका
दिन भर
खेले खेल,
मस्ती करत डांटन
जो आए उसको
हो जाए जेल ।
मस्ती का दिन
इक रविवार ही
आता है,
जो सुबह जल्दी
से हमको
जगाता हैं।
हंसी ठिठोली​
मौज मस्ती की
पूरी दुकान लग
जाती है,
यही सभी बच्चों
के मन को
भाती है।
छुट्टी का दिन
बीत गया पूरा
न होता हमारा
खेल,
पर जब मम्मी
बुलाने​ आए तो
बन जाए हम
सब की रेल।