सम्मान कर

हृदय को न पाषाण कर
इसमें मानवता का भी
कुछ सम्मान कर।
जो मिट चुका है
उसको मिटने दे,
नवीन आते
ज्ञानधारा के स्रोत का
कुछ सम्मान कर।
भूमंडल के भूतल पर
न किसी का अपमान कर,
अपनो के साथ-साथ
परायों का भी
हृदय से सम्मान कर।
अगाध आकाश मे उड़ते
परिंदों पर तो
सब मान करते हैं
नवीन उड़ते पुलकित
पंखों का भी तू
कुछ सम्मान कर।

राजीव डोगरा
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा