तुम जो आये हो शहर से जैसे आये हो बाजार से। न चेहरे पर ख़ुशी, सिलवटों ने बढ़ा दिया कुछ परेशानियों को। यहाँ जो दौलत थी छिन सी गई शहर के बाजार में तुम ले गए थे बड़ी से बड़ी दौलत यहां से। माथे पर ये खिंची रेखाएं बता रही तुम आये हो बेजार से। ----आकांक्षा मिश्रा