मतदान आपकी जिम्मेदारी, ना मज़बूरी है। मतदान ज़रूरी है।

योगी! तेरे राज्य में जनता है मज़बूर

  • — आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

अन्धकार है छा गया, शासक है बेहोश।
पनही लगाओ मुँह पर, आये शायद होश।।
जनता भी कुछ कम नहीं, चाटे शहद लगाय।
‘हिन्दू’ ‘मन्दिर’ जाप कर, स्वर्ग सहज ही पाय।।
पानी-बिजली दूर अब, सब हिन्दू बेहाल।
‘नमो-नमो’ के जाप से, नहीं गले अब दाल।।
मौन दिख रहे भक्त हैं, ठोक रहे हैं माथ।
दुर्दिन में नहीं राम हैं, छोड़ गये सब साथ।
नहिं सुरक्षित बेटी यहाँ, नहिं कोई विश्वास।
चोर-चमारी हर जगह, किस पर धर लें आस।।
गांधी का यह देश है, दिखता चोर-प्रदेश।
चीरहरण है हर जगह, दुश्शासन का वेश।।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ६ अक्तूबर, २०२० ईसवी।)