जयति जैन “नूतन”

घर से भाग जाती है जो बेटियां
वे ले जाती हैं कई बेटियों के सपने
उनकी उम्मीदें,
वह कायम कर जाती है
मां बाप के दिलों में एक डर
जो उन्हें दिन रात सताता है
कहीं दूसरी बेटियों की तरह
मेरी अपनी भी बेटी,
मेरी इज्जत को नीलाम ना कर दे,
कहीं मेरी बेटी भी बहकावे में आकर
किसी ऐसे शख्स को ना चुन ले
जो उसके काबिल नहीं,
कहीं किसी गलत राह पर
ठोकर खाकर ना गिर जाए,
कहीं उसे संभालने के लिए मैं मौजूद ना रहूं,
उस वक्त मेरा हौसला ही उसे शक्ति देगा
पर यह हौसला भी,
कई बेटियां तोड़ जाती हैं,
जब घर की बेटियां भाग जाती है।