फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाए शिक्षकों से तीन करोड़ की रिकवरी के आदेश

2014 में हुई थी शिक्षकों की नियुक्ति 77 शिक्षक मिले थे फर्जी, शहर कोतवाली में दर्ज हुई थी एफआईआर क्राइम ब्रांच कर रही है मामले की जांच

             हरदोई- फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने वाले 66 मुन्नाभाई अध्यापकों की मुसीबतें बढ़ गयी है।फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने वाले अध्यापकों से वेतन के 3 करोड़ रुपये की रिकवरी के आदेश जारी किए गए है।यह मुन्नाभाई शिक्षक करीब 2 साल तक नौकरी करते रहे है।बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को इस तरह का आदेश जारी किया है।इस मामले में शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी और मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।
            टीईटी  की फर्जी अंक पत्र लगाकर शिक्षक की नौकरी पाने वालों में 66  लोगों का नाम सामने आया है।यह सभी 1 साल 5 माह तक नौकरी कर रहे थे विभागीय जांच में जब इसका खुलासा हुआ तो बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इन मुन्नाभाइयों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है।बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमन्त राव ने इन सभी शिक्षकों से अब तक ली हुई तनख्वाह की रिकवरी के आदेश जारी किये है।दरअसल परिषदीय विधालयो में फर्जी अंक पत्रों के आधार पर एक साल पांच माह तक वेतन पाने वाले 66 शिक्षको से सवा तीन करोड़ रूपये की रिकवरी की जायेगी विभाग की और से इस संबंध में सभी खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी कर दिए गए है।
            दरअसल परिषदीय विद्यालयों में शिक्षको की कमी को पूरा करने के लिए अगस्त 2014 में शिक्षको की नियुक्ति की गई थी। नियुक्ति के बाद 77 शिक्षको की टीईटी अंक पत्र फर्जी मिले थे जिस पर उनका जनवरी 2016 में वेतन रोक दिया गया था और दो माह बाद बर्खास्त कर उनके विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।जिसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।इन शिक्षको से लिए गए वेतन की रिकवरी के आदेश अपर मुख्य सचिव डाक्टर प्रभात कुमार की ओर से जारी किये गए है।विभागीय आकड़ो की माने तो इन शिक्षको ने एक साल पांच माह तक वेतन लिया है जिसकी प्रति टीचर धनराशि 30 हजार से ऊपर की है।बीएसए हेमंत राव ने बताया की जनपद में फर्जी नियुक्ति के संदर्भ शासन से निर्देश प्राप्त हुए थे जिसके संदर्भ में उससे सम्बन्धीत जितने शिक्षक वेतन पा चुके उनसे रिकवरी के आदेश दिए जा चुके है।