कवयित्री:- सुचिता अग्रवाल ‘सुचि संदीप’
पृष्ठ:- 88
प्रकाशक:-ग्रामोदय प्रकाशन, दिल्ली
मूल्य:- 200₹
समीक्षक:-राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
कवि एवं साहित्यकार
कवयित्री सुचिता अग्रवाल का काव्य संकलन “मन की बात” में कुल 55 कविताएं है। अधिकांश कविताएं छंद मुक्त लिखी गयी है। अग्रवाल ने अपनी कविताओं में भारतीय संस्कृति, परम्परा, पारिवरिक सम्बन्ध, रिश्तों की सच्चाई, देश प्रेम, कौमी एकता, नारी सशक्तिकरण, देश के प्रति स्वदेशी प्रेम के साथ ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर अपनी कलम चलाई है।
साहित्य संगम संस्थान तिनसुकिया असम शाखा की सचिव अग्रवाल ने संस्थान से जुड़कर विगत वर्षों में पारम्परिक छंदों में लिखने का अभ्यास किया। प्रस्तुत कृति में विधाता छंद की रचनाएं लिख कर साहित्य के क्षेत्र में पारंगत होने का प्रमाण दे दिया है। उन्होंने दोहे शीर्षक के अंतर्गत 27 दोहे लिखे जिनकी बानगी देखिये- “भूख लगी है ज्ञान की, बुझे नहीं है प्यास।
ज्यों पानी के बून्द की,मरु धरा को आस”।।
जिस प्रकार रेगिस्तान में व्यक्ति पानी के लिये तरसता हैं उसी प्रकार की ज्ञान प्राप्त करने की तड़प हमें रखना चाहिए।
देश प्रेम से ओत प्रोत उनकी रचना की कुछ पंक्तियाँ- “आओ हम सब दीप जलाएं,पावन यह त्योहार है।
देश की मिट्टी सर्वोपरि है, हमको इससे प्यार है”।।
चल उड़ पंछी शीर्षक से उन्होंने कौमी एकता पर आधारित रचना में सर्व धर्म समभाव की बात कही। “ना जानूँ मैं हिन्दू मुस्लिम, ना जानूँ सिख ईसाई।
दाने कोई देता है तो, करता कोई पानी की भरपाई”।।
अंतिम शब्द कविता में व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की और ले जाने का दिव्य सन्देश दिया है। हमारे वेदों में भी असतो मां सद्गमय। तमसो मां ज्योतिर्गमय।। कहा गया है। वह लिखती है- “ले चलो रोशनी में मुझे,अब अंधेरों से डर लगता है। दिखा दो कोई महफ़िल की रौनक,अब तन्हाई से डर लगता है”।।
व्यक्ति एकाकी रहने के बाद सबके साथ रहने का आनंद रूपी सुख भोगता है। नई पड़ोसन कविता स्वच्छता पर आधारित सामयिक लगी। अलविदा रचना में कवयित्री ने समाज में व्याप्त हिंसा, आतंकवाद,कुकृत्य जैसी घटनाओं पर पैनी कलम चलाई है। वह कहती है- क्या खूब क़त्ल तुम हर रोज़ कर रहे हो,न शक की कोई गुंजाइश न सबूत छोड़ रहे हो। ए मेरे हमसफ़र बस ख़ौफ़ के खंज़र हर रोज़ घोंप रहे हो।।
हास्य रचना ‘मेरा हमसफ़र मोबाइल’ में कवयित्री ने दिन रात व्यस्त रहने वाले लोगों पर बेबाक टिप्पणी करते हुए हास्य परोसा है ,साथ ही मोबाइल से होने वाली बातों पर हास्य लिखने का प्रयास किया है। “क्या कहूँ मेरे हमसफ़र मोबाइल, तुझमें हर रिश्ते सिमटने लगे।
बच्चे और पति भी अब तो तुझमें ही नज़र आने लगे”।।
पापा की गोद कविता में पिताजी के त्याग ,समर्पण व संघर्ष को अभिव्यक्त किया है। क्षमा करें मुझे काव्य रचना में गरीबी,लाचारी,भूखमरी जैसे मुद्दों पर आवाज़ बुलंद की है। कविता नया ये साल आया है में वह लिखती है नये सपने नई राहें नया ये साल आया है। हमारे देश में बदलाव का ये दौर आया है। देश में विगत वर्षों में हुए द्रुतगामी विकास को परिभाषित करने का सार्थक प्रयास किया है। शक्ति आव्हान कविता में उन्होंने लिखा ‘हे माँ तेरी शक्ति के आगे ब्रह्मांड पूरा नत मस्तक है। नारी शक्ति का प्रतीक तुम ही हो गौरान्वित नारी तुमसे ही है।रचना में नारी सशक्तिकरण पर प्रकाश डाला गया है। रिश्ते कविता में वह लिखती है- आफत के रिश्ते बन जाते है,जीवन भर ढोते है हम। मन की जहां नहीं हुई तो चुगली करते रोते है हम।। रचना में रिश्तों की खींचा-तानी व अपनत्व की भावना में कमी को दर्शाती है। प्रतीक्षा कविता में वह लिखती है खुशियों में आने की प्रतीक्षा रहती है तो गमों का भय सताता है। खुशी,हर्ष और उमंग लाती है तो गम रुला कर जाता है। जीवन में खुशियों के रंग कब गमों में बदल जाये पता नही चलता। प्रस्तुत रचना बहुत ही सुंदर बन गयी।
हुई फिर देश में हिंसा इस कृति की उत्कृष्ट रचना है,जिसमे कवयित्री लिखती है-” शराफ़त के मुखोटों में दरिंदे लाख बैठे है। इशारों पर भभक उठता, शहर सारा वतन देखो”।।और “करे चीत्कार मांगे न्याय,जो निर्दोष थे बन्दे। भटकती रूह रो रोकर, करे फ़रियाद सब देखो”।। दोनों शेर उम्दा है। कवयित्री ने आज के दौर में देश में व्याप्त हिंसा, आतंकवाद को शब्दों में ढालने का प्रयास किया है।
देश की वंदना करती हुई कवयित्री लिखती है-” आओ हम सब दीप जलाएं, पावन ये त्योहार है। देश की मिट्टी सर्वोपरि है, हमको इससे प्यार है।।”
प्रस्तुत काव्य संकलन में कविताओं की भाषा सीधी सरल एवं बोधगम्य है। मां का उद्गार , पुत्र सौगात, चल उड़ पंछी, असम है मेरा सनम, गज वदन नमन, नहीं व्यर्थ गवाओ जीवन को, मनो व्यथा नारी की, बाबू जी आपकी याद में, अंतर्वेदना,एक चिड़िया की सोच, दिलों के घाव, प्रार्थना, वो गुज़रा ज़माना, नई सोच नया सवेरा, यही आगाज़ है यारों, हिंदी को सलाम, क्रोध घातक प्रवृत्ति, मैं वल्लरीमिले चार दिवस जैसी रचनाएं भी महत्वपूर्ण है।
साहित्य जगत में “मन की बात” कृति से कवयित्री सुचि संदीप अपनी पहचान बनाएगी ,इन्हीं शुभकामनाओं के साथ अनंत बधाई।
98,पुरोहित कुटी
श्री राम कॉलोनी
भवानीमंडी
जिला-झालावाड़
राजस्थान
मोबाइल:-7073318074