वैसे तो पिछले साल बाढ़ में भी इस क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा था, पर वर्ष 2010 में आई बाढ़ काफी भयावह थी। एक पखवाड़े से ज्यादा समय तक रही बाढ़ से एक अरब से ज्यादा की संपत्तियों का नुकसान हुआ था तथा सैकड़ों लोग बेघर होकर दाने-दाने को मोहताज हुए थे। बाढ़ के मंजर को याद कर आज भी लोग सिहर उठते हैं।
हरदोई जिले में गंगा, रामगंगा, गंभीरी, गर्रा व नीलम नदी के उफान पर होने से सैकड़ों गांव प्रभावित होते हैं और बाढ़ का पानी निकलने में एक माह का समय लगता है। लगभग हर साल पंच नदियों गंगा, रामगंगा (कुंडा), गंभीरी, नीलम व गर्रा से घिरा सवायजपुर व बिलग्राम तहसील का अधिकांश हिस्सा बाढ़ की चपेट में आता है, जिससे करीब 1100 गांवों व मजरों मेें रहने वाली 3 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित होती है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010 में आई भयावह बाढ़ में कुल 78,105 हेक्टेयर कृषि क्षेत्रफल में 62,840 केफसली रकबे मेें से 49,987 हेक्टेयर फसलें चौपट हो गई थीं और 12,178 मकान धराशायी हो गए थे। दो दर्जन डामर की सड़कें कटने के साथ 6 अरब रुपए का नुकसान हुआ था और 14 लोगों की मौत तथा 13 पशु भी बाढ़ की चपेट में आकर मर गए थे। इसके एवज में प्रशासन ने 13 करोड़ रुपए की मदद बाढ़ पीड़ितों को दी थी।
नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है और खतरे के निशान तक पहुंचने की कगार पर है। हालांकि डीएम पुलकित खरे का कहना है कि दोनों एसडीएम सवायजपुर व बिलग्राम को निर्देश दिए हैैं कि बाढ़ से प्रभावित होने वाले ग्रामों का स्थलीय निरीक्षण करें तथा बाढ़ चौकी, नाव, नाविक और बाढ़ में उपयोग होने वाली समस्त आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र के ग्रामीणों को पहले से सचेत कर दिया जाए और बाढ़ आने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर लें। डीएम ने ग्रामीणों से कहा कि बाढ़ की स्थिति में उन्हें सहायता दी जाएगी । उन्होंने एसडीएम को निर्देश दिए कि गुणवत्ता बनाए रखने के साथ सभी कार्य समय से पूर्ण कराएं। ज्ञात हो कि भीषण बाढ़ आने पर सबसे ज्यादा सवायजपुर और बिलग्राम तहसील क्षेत्र के गांव प्रभावित होते हैं और हरदोई सदर तहसील तथा शाहाबाद तहसील क्षेत्र आंशिक रूप से प्रभावित होते हैं। चार सौ से ज्यादा गांव व मजरें और चार लाख से ज्यादा आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है। इनमें भी सबसे ज्यादा गांव सांडी, हरपालपुर, बिलग्राम, मल्लावां, माधौगंज ब्लाक क्षेत्र के प्रभावित होते हैं। कटियारी क्षेत्र में गर्रा, गंगा, गंभीरी, रामगंगा, नीलम नदियों से प्रभावित होता है।
इस बार भी अगर भीषण बाढ़ आती है, तो प्रशासन के सामने बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले गांवों एवं मजरों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चुनौती होगी।उधर हरपालपुर क्षेत्र में रामगंगा नदी तकरीबन हर वर्ष कहर बरपाते हुए सैकड़ों मकानों को अपनी धारा में समां ले जाती है। नदी की हर साल धारा बदलने से हजारों हेक्टेयर जमीन भी कटकर नदी के आगोश मेें समां जाती है, जिससे बड़ी संख्या मेें किसान भूमिहीन हो रहे हैं।सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बारामऊ, ढकपुरा, मुरवा शहाबुद्दीनपुर, आलमपुर, अरबल, चंद्रमपुर, दहेलिया, कटरी छोछपुर, नोनखारा, बेडीजोर, बेहथर, बेहटालाखी, बेहटा मुडिया आदि गांव रामगंगा नदी की धारा के निशाने पर गोरिया, बड़ागांव, मलिकापुर, बारी, बरान, सुरजनापुर, बाराम, बेहथर, मलिकापुर, नंदना आदि समेत एक दर्जन से ज्यादा गांव है।