● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
२३ फ़रवरी, २०२२ ई० की रात्रि से रूस-द्वारा युक्रेन पर लगातार किया जा रहा आक्रमण अब रूस के लिए गले की फाँस बन चुका है। अब तक रूस के लगभग ८० हज़ार सैनिक मारे जा चुके हैं; हज़ारों की संख्या मे युद्धक विमान और शस्त्रास्त्र नष्ट किये जा चुके हैं। जेलेंस्की ने पुतिन को घुटनो पर लाकर खड़ा कर दिया है।
घायल शेर की तरह से जेलेंस्की के सैनिकों ने रूसी इलाक़ों मे ज़बरदस्त (‘ज़बर्दस्त’ अशुद्ध है।) हमला कर, रूस को बहुत अधिक क्षति पहुँचायी है। युक्रेन के कई संवेदनशील क्षेत्रों मे बारूदी सुरंग बिछा दी गयी है, जिससे रूसी आक्रमण की योजना को ध्वस्त कर दिया जा रहा है। इस समय युक्रेन का हवाई हमला रूस पर बहुत भारी पड़ चुका है।
अब रूस सन्धि करने की पहल कर दी है; परन्तु ज़ेलेस्की ने इसके लिए कई प्रकार की शर्तें प्रस्तुत कर दी हैं, जिन्हें रूस ने स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है।।
युक्रेन ने हिमार्स और मैलिटोपोल मे रोटर हेलीकॉप्टर से भीषण हमला किया है।
रूस की पहल पर ध्यान न करने के कारण पुतिन बौखला गया है और वह भी युक्रेन पर भीषण हमला शुरू कर चुका है। रूसी फ़ौज ने कीव, चेरकासी तथा किरेबोह्राड पर भीषण हवाई हमले शुरू कर दिये हैं।
संयुक्त राष्ट्रसंघ और उसकी शाखा सुरक्षा परिषद् कई दशक (‘दशकों’ का प्रयोग अशुद्ध है; क्योंकि दशक दस का समाहार/ समूह है।) से नपुंसक के रूप मे दिखती आ रही हैं (‘दिखते आ रहे हैं’ अशुद्ध है; क्योंकि अन्तिम कर्त्ता ‘सुरक्षा परिषद्’ स्त्रीलिंग का शब्द है।)।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १५ नवम्बर, २०२२ ईसवी।)