— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

नियम-क़ानून तो लोकतन्त्र को जीनेवाले हम गुनहगारों के लिए है। अब आँखें चियार करके देखिए– इनके और अनुयायियों ने कितना प्यारा आदर्श प्रस्तुत किया है। सरकारी लोग हमें सरकारी ‘सोसल डिस्टैंसी’ और ‘मास्क’ लगाने का पालन करना इस तरह से सिखाते हैं।
आइ०ए०एस० और आइ०पी०एस० का सपना देखने के बाद सच में आइ०ए०एस० और आइ०पी०एस०- अधिकारी बन जाने के बाद उनमें साहस नहीं रह जाता कि वे आँखों के सामने “डंके की चोट पर” अपराध करते हुए किसी खद्दरधारी की ओर नज़रें भी उठा सकें। ऐसे अधिकारियों के ‘चरित्र का पतन’ यहीं से शुरू हो जाता है, जो उन्हें आगे चलकर ‘भ्रष्टाचारी’ बना देता है।
ये हैं नेता जी। इनके लिए संख्या का कोई बन्धन नहीं; नियम-क़ानून गया तेल लेने, फिर तेल देखिए और तेल की धार देखिए।
हमारे लिए क़ानून अलग और इनके लिए अलग।
वाह री! उत्तरप्रदेश की सरकार।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २८ जून, २०२० ईसवी)