शिव को सर्वाधिक प्रिय है, ‘श्रावणमास’

आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

यह ‘संस्कृत-भाषा’ का शब्द है, जोकि शब्दभेद की दृष्टि से विकारी शब्दान्तर्गत संज्ञा है तथा लिंगानुशासन के विचार से पुंल्लिंग-शब्द। यह षष्ठी तत्पुरुष समास का उदाहरण भी है। यह दो सहायक शब्दोँ का योग है, जो ‘श्रावण’ और ‘मास’ हैँ। ये ‘श्रावण का मास’/ ‘सावन का महीना’ का अर्थ प्रकट करते हैँ। श्रावण शब्द को समझने के पूर्व ‘श्रावणी’ शब्द का अध्ययन करना होगा; ऐसा इसलिए कि श्रावण शब्द की रचना ‘श्रावणी’ मे ‘अण्’ प्रत्यय के योग से होती है। श्रावण शब्द मे ‘ङीष्’ प्रत्यय के जुड़ने से ‘श्रावणी’ शब्द की उत्पत्ति होती है। यह श्रावण शब्द का स्त्रीलिंग है, जो संस्कृत-भाषा का संज्ञा शब्द है। इसके भिन्न-भिन्न अर्थ हैँ :– सावनी; सावन महीने की पूर्णमासी; रक्षाबन्धन त्योहार आदिक। श्रावण के समानार्थी शब्द हैँ :– सावन, श्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद और भाद्रपद (भादोँ) से पूर्व का महीना इत्यादिक। श्रावण ‘विशेषण-शब्द’ के अर्थ मे ‘श्रवण-सम्बन्धी’ के रूप मे प्रयुक्त होता है। श्रवण के अर्थ सुनना; सुनने का भाव अथवा क्रिया; सुनने की इन्द्रिय आदिक हैँ। इसे ‘श्रवण नक्षत्र-सम्बन्धी’ भी कहा जाता है।

श्रावण जनसामान्य मे ‘सावन’ नाम से अत्यधिक प्रचलित है, जिसके अर्थ हैँ :– बारह महीने मे से एक महीना, जो आषाढ़ के बाद और भाद्रपद से पूर्व होता है; एक प्रकार का सावन-महीने का गीत। ‘श्री रामचरितमानस’ मे गोस्वामी तुलसीदास ने कहा है, “राम के बरन दोऊ, सावन-भादौं मास।”

श्रावण के तद्भव शब्द सावन का स्त्रीलिंग ‘सावनी’ है, जो कि श्रावणी का तद्भव शब्द भी है। इसका अर्थ है– वह उपकरण अथवा सामान, जो वर के यहाँ से कन्या के यहाँ ब्याह के प्रथम वर्ष सावन के महीने मे भेजा जाता है। सावन की पूर्णमासी को भी ‘श्रावणी’ कहा गया है। इसके ‘विशेषण’ के रूप मे अर्थ हैँ :– ‘सावन-सम्बन्धी’ और ‘सावन का’।

श्रावण के साथ जुड़ा शब्द ‘मास’ संस्कृत-भाषा का शब्द है। शब्दभेद की दृष्टि से विकारी शब्दान्तर्गत यह संज्ञा है तथा लिंगविचारानुसार पुंल्लिंग-शब्द। यह ‘मस्’ धातु का शब्द है, जिसका अर्थ ‘परिणाम होना’ है। मस् के अन्त मे ‘घञ्’ प्रत्यय के लगते भी ‘मास’ की रचना होती है। इसके समानार्थी शब्द हैँ :– महीना, मासक, माह, दो पक्षोँ का समय, तीस दिनो का समय इत्यादिक।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २४ जुलाई, २०२५ ईसवी।)