प्राचीनकाल में राजनीति में पाँच कूटनीति प्रशस्त थी।
जो बाहरी दुर्जनों या अपराधियों को काबू में करने के लिये प्रयोग की जाती थी।
साम, छल, दंड, दान, भेद को ही पाँच कूटनीति (प्रपंच) नाम से भी जाना जाता था।
समय बदलने के साथ-साथ राज करने वाले लोग बदल गये।
जब दुष्ट/दुराचारी लोग राजा बने तब यही कूटनीति सज्जनों को गुलाम बनाये रखने के लिये प्रयोग होने लगी।
युगों से इस कूटनैतिक प्रपंच के द्वारा ही मनुष्य को गुलाम बनाकर रखा गया है।
वर्तमान व्यवस्था में भी 5% धूर्त लोग इसी पञ्चकूटनीति के द्वारा भोली भाली जनता को मानसिक रूप से गुलाम बनाके रखे हुये हैं।
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1◆ सामनीति(चापलूसी):-
हाथ जोड़कर, नतमस्तक होकर, विनम्रतापूर्वक जनता का दिल जीत लेते हैं।
2◆ छलनीति(कपट):-
बड़े-बड़े वादे करके, झूठे स्वप्न दिखा करके जनता का समर्थन हासिल करते हैं, और जनता के मेहनत की कमाई पर सेंधमारी करते हैं।
3◆ दंडनीति(भय):-
अन्यायी नियमों, झूटी मान्यताओं के भय दिखाकर जनता को आपने कब्जे में करके रखते है।
4◆ दाननीति(लालच देना):-
जनता का ही धन विभिन्न योजनाओं के द्वारा जनता में बांटकर, व्यक्तिगत व साम्प्रदायिक लालच देकर जनता को पने वश में करके रखते हैं।
5◆ भेदनीति( फूट डालना):-
जनता को एकता के नाम पर जाती, सम्प्रदाय, भाषा, क्षेत्र, लिंग, रंग, रूप आदि अनेक प्रकार के भेदों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर तोड़कर कमजोर करके उनके ऊपर प्रभुत्व कायम रखते हैं।
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इसी कूटनीति के द्वारा देश की 95% सम्पदाओं पर 5% का स्वामित्व कायम है।
और बाकी 5% सम्पदाओं पर चल रही है 95% जनता के स्वामित्व की लड़ाई और खीचतान।
उपरोक्त विषय को ध्यान से पढें और विचार करें कि आप कौन हैं?
कूटनीति द्वारा बनाये हुए गुलाम या न्यायनीति द्वारा आजाद हुए मनुष्य?
अशिक्षा रूपी हथकड़ी,
बेरोज़गारी रूपी बेडी,
असुविधा रूपी हंटर एवं
असुरक्षा रूपी शूल द्वारा सताये हुये उस 75 वर्षीय भाजपाई/कांग्रेसी अत्याचारी अन्यायी कुशासन के दास या स्वतन्त्र नागरिक?
�� जागो.. जनता.. जागो..!!
आओ मिलकर सम्पूर्ण राष्ट्र में अब आमआदमीपार्टी द्वारा विकसित किये गए दिल्ली मॉडल को जन-जन तक लेकर जाएं और नागरिकों को उनके चारों जनाधिकारों के प्रति जानकार व जागरूक बनाएं।

✍ राम गुप्ता (स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आमआदमीपार्टी, उत्तरप्रदेश