For Complaints and Suggestions frequently contact to Editor/Director E-Mail-- editor@indianvoice24.com or Mobile: 9936943257 (WhatsApp), 9415510476

IV24 News and Entertainment

IV24 News and Entertainment

विचारणीय विषय - विशद् विश्लेषण

रुद्राभिषेक के समय जयदेवेश्वर महादेव की आरती और

  • Raghavendra Kumar Raghav – Personal Page
  • मुख्यमंत्री की नीति आयोग के उपाध्यक्ष तथा अन्य अधिकारियों के साथ बैठक सम्पन्न
  • वैधानिक
  • संपर्क
  • हमारे बारे में
Breaking News
  • [ September 6, 2026 ] आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला भाषाविज्ञान
  • [ September 5, 2026 ] हम कैसे कह देँ– “आचार्य देवो भव” आपकी बात : THINKING MATTER
  • [ September 5, 2026 ] किसी शिक्षालय का ‘सच’ दिखाना ‘अपराध’ क्योँ? आपकी बात : THINKING MATTER
  • [ September 4, 2026 ] धर्मवीर भारती को ‘इलाहाबाद’ ने ही बनाया था, ‘गुनाहों का देवता’ साहित्य
  • [ September 3, 2026 ] कृष्ण : बांसुरी की मिठास, सुदर्शन की धार और गीता का अमर सत्य अध्यात्म
Homeराष्ट्रीयउत्तर प्रदेशबनारस (काशी)काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा में होगी अपार वृद्धि

काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा में होगी अपार वृद्धि

December 12, 2021 बनारस (काशी) 0

Share this on WhatsApp

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल उत्‍तरप्रदेश के वाराणसी में काशी विश्‍वनाथ धाम के पहले चरण में नवनिर्मित परिसर का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री ने सभी से कल के कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया है। उन्‍होंने कहा कि काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा में अपार वृद्धि होगी। श्री मोदी ने कहा कि कल एक ऐतिहासिक दिन है।

इस परिसर का निर्माण करीब 339 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। परियोजना के पहले चरण में कुल 23 भवन बनाए गए हैं। इसमें काशी विश्‍वनाथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई तरह की सुविधाएं उपलब्‍ध कराई गई हैं, जिनमें यात्री सुविधा केंद्र, मुमुक्षु भवन, भोग शाला, संग्रहालय, देखने वाली दीर्घा, रेस्‍तरां और अन्‍य कई तरह की सेवाएं शामिल हैं।

प्रधानमंत्री की काफी समय से यह इच्‍छा थी कि बाबा विश्‍वनाथ के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को भीड़-भाड़ वाली गलियों और आसपास के इलाके से होने वाली दिक्‍कतों से छुटकारा दिलाया जा सके। इससे वह आसानी से गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगा सकें और गंगाजल लाकर मंदिर में चढ़ा सकें। श्री मोदी की इस इच्‍छा को श्रीकाशी विश्‍वनाथधाम परियोजना के रूप में मूर्त रूप दिया गया है।

Share this on WhatsApp
  • Be spiritual like Lord Shiva
  • Kashi Vishwanath
  • lord Shiva
  • spiritual energy
  • Spirituality
Previous article
Next article

Related Articles

No Picture
गुजरात

आध्यात्मिकता और दिव्यता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थान है गथिला का उमिया माता मंदिर

April 10, 2022 0
No Picture
बनारस (काशी)

Shri Kashi Vishwanath Dham is symbol of the Sanatan culture

December 13, 2021 0
No Picture
हरदोई

परिवार में सामंजस्य स्थापित करना महादेव के परिवार से सीखो : आचार्य शिवम जी महाराज

December 6, 2023 0

Advertisement

Feature Post

  • आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

    September 6, 2026 0
  • हम कैसे कह देँ– “आचार्य देवो भव”

    September 5, 2026 0
  • किसी शिक्षालय का ‘सच’ दिखाना ‘अपराध’ क्योँ?

    September 5, 2026 0
  • धर्मवीर भारती को ‘इलाहाबाद’ ने ही बनाया था, ‘गुनाहों का देवता’

    September 4, 2026 0
  • कृष्ण : बांसुरी की मिठास, सुदर्शन की धार और गीता का अमर सत्य

    September 3, 2026 0
  • बहुपक्षीय मंच, कूटनीतिक बिसात : बिश्केक में बुना गया रणनीतिक संबंधों का ताना-बाना

    September 2, 2026 0
  • पलाऊ दौरे पर विदेश राज्य मंत्री, साझा किया समृद्ध इंडो-पैसिफिक विजन

    September 1, 2026 0
  • नेपाल त्रासदी : सुरंगों में रेस्क्यू और डीएनए पहचान में जुटे भारतीय विशेषज्ञ

    August 31, 2026 0
  • The Youth of India

    August 30, 2026 0
  • “फ़िराक़ की कृतियाँ संस्कृत-श्लोक की भावप्रवणता से प्रभावित दिखती हैँ”– प्रो० राहत अबरार

    August 29, 2026 0
  • कहानी : कतरा-कतरा आँसू

    August 28, 2026 0
  • ‘राखी की लाज’ लिखने वाले को ही नहीं थी लाज

    August 27, 2026 0
  • मनुस्मृति कहती है ‘आमन्त्रितस्तु यः श्राद्धे वृषल्या सह मोदते’

    August 26, 2026 0
  • सावन वाला सच्चा प्यार

    August 25, 2026 0
  • यादों की गली मे डॉ० पवन विजय

    August 24, 2026 0
  • भारतीय हॉकीदल पुरुषहॉकी-विश्वकप से बाहर हुआ!

    August 23, 2026 0
  • कहानी : रिश्तों का हिसाब

    August 22, 2026 0
  • ये जानता हूँ तुम हमें मानते नहीं

    August 21, 2026 0
  • ”आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की समीक्षा मे सद्भावना और काव्यालोचना मे देशहित और कालगत संस्कार का समावेश है”– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

    August 20, 2026 0
  • “फ़ादर कामिल बुल्के ने ‘राम’ पर शोध करते समय रामायण के तीन सौ रूपोँ की खोज की थी”– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

    August 18, 2026 0
Copyright @ Indian Voice 24
L.O.C. (League Of Citizens)
Designed By: Infinity Ventures (India) Pvt Ltd