कहानी- दरकते रिश्ते

नीना अन्दोत्रा पठानिया-


रोज की तरह अंजली ऑफिस से आकर घर के काम निपटा कर जैसे ही रूम आई तो देखा अशोक सो गया था। अंजली अशोक को सोता हुआ देख कर सोचने लग गई, यह कैसी जिंदगी है रोज़ शाम को घर आते हैं , खाना खाते हैं और सुबह फिर तैयार होकर काम के लिए निकल जाते हैं ।  एक दूसरे को जानते हुए भी कैसे हम अजनबियों जैसी जिंदगी जी रहे हैं ।
हर रोज़ सोचती हूँ अशोक को गुड न्यूज़ के बारें में बताऊगी पर हर रोज़ जल्द बाजी के चक्कर में रह जाती हूँ । अंजली डरती भी है कि कहीं इस बार भी अशोक वैसा ही न कहे जैसा हमेशा कहता आया है । अभी बच्चा नही चाहिए, कौन खर्चा उठेगा ? अभी नही बाद में सोचेंगे बच्चे के लिए… सोचते – सोचते अंजली उदास हो गई । फिर वो इन्टरनेट पर अपने पुराने दोस्तों से चैटिंग करने लग गई । बहुत रात हो चुकी थी , तुम अभी सोयी नही , अचानक अशोक ने करवट लेते हुए कहा । नहीं नींद नही आ रही । चैटिंग की लत जो लगी है तुम्हे नींद कैसे आयगी, अशोक ने व्यग्य भरे स्वर में कहा और खुद भी इंटरनेट ऑन करके बैठ गया ।
हाँ..हाँ मुझे लत लगी है और आपको क्या ? खाया –पिया और सो गये , बस यही तो जिंदगी है । खीझते हुए अंजली बोली , मात्र दो साल की शादी में दोनों पति-पत्नी एक दूसरे से बहुत दूर हो चुके थे । मुझे आपसे बात करनी है, अपने आप को शांत करते हुआ अंजली ने कहा ।
ह्म्म्म … कहो अशोक ने सारा ध्यान फेस बुक पर किसी से चैटिंग करते हुए कहा । आप पापा बनने वाले है । पर अशोक ने सुनकर भी अनसुना कर दिया और अपने कार्य में व्यस्त रहा । फिर कुछ देर बाद बोला “पापा और मैं ? मना किया था न तुम्हे और अब ध्यान से सोच लो बच्चा चाहिए या मैं । दोनों में से एक चुन लो । सुनते ही अंजली बौखला गई और कुछ देर अशोक को ध्यान से घूरती रही और फिर उठकर बाहर चली गई । सोचती है कब रिश्तें इतने खोखले हो गये , पता ही नहीं चला । ऐसे रिश्ते को किसलिए निभाना जब साथ होकर साथ नहीं अंजली मन बना चुकी थी, माँ बनने का सिर्फ माँ…